Monday, June 24, 2019

सिलसिला

 पहली नज़र ..पहली मुलाक़ात ,
होने लगी थी जबसे बात ,
ना वो कुछ कहते , ना हम सुनाते ,
ख़ामोश रह कर आँखों से सब कह जाते ।

हुआ शुरू जो था सिलसिला ये ,
अब हर रोज़ चलने लगा था ,
कल तक निगाहो को मिलाने वालों का ,
अब दिल भी मिलने लगा था ।

बड़ी ठंडक और सुकून देते थे पल वो ,
जब कभी वो मेरे क़रीब आ जाते ,
समेटे पहाड़ों से ऊँचे अल्फ़ाज़ ,
ना जाने कहा छिप जाते ।

हर रोज़ जब भी देखता उसे मुस्कुराते ,
गालों पे बन कोहिनूर डिम्पल बन आते ,
देख अदा जिसकी ख़ूबसूरत ,
बस आँखों से ही हम इश्क़ में डूब जाते ।

जो सिलसिला आँखों से शुरू हुआ ,
ना जाने कहाँ ख़त्म होगा ,
नहीं फ़ुर्सत उन्हें सुनने की मुझे ,
इस सिलसिला का क्या हश्र होगा ।


अब भी होती है बातें निगाहों से अक्सर ,
पर अब हम नज़रें उनसे चुराते ,
कमबख़्त कौन रोके इस चालू दिल को ,
एक दफ़ा फिर आइये सिलसिला चलाते ..

आइये एक दफ़ा फिर नज़रें मिलाते ,
आइये एक दफ़ा फिर उनमें खो जाते ।।

Saturday, June 8, 2019

बस ... और नहीं

रात के अंधेरे में ,
सब जगमगा रहे थे ,
सुनसान से होते रास्तों पर ,
जब हम चलने को आ रहे थे ।

रुक .. थाम कर उम्मीद लिये ,
हम एक जगह ठहर गये ,
आई पुकार कर मंज़िल की बस ,
जिस पर हम चढ़ लिये ।

थे और भी साथ मेरे , मुझ जैसे ,
लगा नहीं कुछ अलग वैसे ,
पर तभी एक भेड़िया पास आया ,
देख जिसे मन घबराया ।

सुकून के नींद में ,
जब सब सो रहे थे,
उस वक़्त हम इज़्ज़त की भीख माँग ,
बहुत रो रहे थे ।

छुआ जैसे उसने मुझे समझ कोई खिलौना ,
मैं ज़ोर से थी चिल्लाई ,
पर उस घनी रात और सुनसान रास्तों पर ,
मेरी आवाज़ नहीं थी कही पहुँच पाई ।

जिस्म को मेरे नोच दरिंदो ने ,
अपनी हवस की भूख थी मिटाई ,
ज़िंदा लाश बन कर पड़ी थी मैं ,
फिर भी उन्हें रहम ना आई ।

चंद लम्हों में मैं इस दुनिया से चली गई ,
सवाल बहुत पीछे छोड़ गई ,
शायद अब कुछ बदल जाये ।

शायद ...अब बस और नहीं ,
किसी की इज़्ज़त कोई नीलाम कर पाये ,
शायद मेरा दर्द इतिहास बन जाये ,
शायद अब देश बदल जाये ।।

बस और नहीं ..!!

Thursday, May 16, 2019

मेरा पहला प्यार

बस उम्र की दहलीज़ पकड़ कर ,
दो राहें पर जाने वाले थे ,
नन्हा था दिल ज़रूर मेरा ,
पर हम ठहरे दिल वाले थे ।

हमने देखा जो पहली दफ़ा उसे ,
उसकी सुलझी ज़ुल्फ़ें .. मासूम निगाहे ,
किसी कोने में चुप चाप खड़ी थी ,
मेरी निगाहों को क़रीब जाने की हड़बड़ी थी ।

पहली दफ़ा धड़का था दिल मेरा ,
कुछ अलग से अन्दाज़ में ,
मालूम नहीं था हो गया इश्क़ ,
इसी आग़ाज़ में ।

उसके गालों का तिल और थिरकते क़दम ,
हम सब उसपर लूटा चुके थे ,
मालूम नहीं होता जब ख़ुद का पता ,
उस उम्र में उसे दिल में बसा चुके थे ।

आज मिल गई मुझे मंज़िल ... लगा ऐसा ,
जब पहली दफ़ा वो पास मेरे आई थी ,
सुनसान से थे जज़्बात और लम्हे ,
पर प्यार में सच्चाई थी ।

जब कोयल सी लगी बोली मीठी उसकी ,
बस मैं ख़्वाबों में खो गया ,
कहा था पहली दफ़ा कुछ उसने मुझसे ,
सुन जिसे इश्क़ में उसके.. मैं रो गया ।

खोना ना कभी सीखा था ,
और पाना लगा अब ना होगा मुमकिन ,
रंग लिये हाँथों में लाल ,
भर दी माँग मैंने उसी दिन ।।

उस दिन के बाद ,
हर पल वो दूर जाने लगी ,
बड़ती उम्र के साथ दिल लगाने लगी ,
हुआ मालूम तब इस दिल को कही ...,
कमबख़्त एक तरफ़ा सी थी पहली मोहब्बत मेरी ।। 

Saturday, May 11, 2019

माँ

आँखे खुली जो पहली दफ़ा ,
नज़र मुझे तू आई ,
बस मेरी पहली चीख़ पर ,
थी तू मुस्कुराई ।।

सिने से लगा कर मुझको ,
ख़ुद में छिपा लेती ,
होता नहीं इक पल भी दूर ,
मुझे आदत बना लेती ।

हर सुबह सूरज से पहले वो आ जाती ,
उम्मीद और हौसला दे मुझे जगाती ,
फिर भी मैं जा कर सो जाता ,
देख जिसे माँ को ग़ुस्सा आता ।।

चहरे पे ग़ुस्सा और हाथो में छड़ी ,
होती थी अक्सर माँ खड़ी ,
देख जिसे मैं झट से जग जाता ,
तब जा कर माँ को चैन आता ।

शाम को जब भी लौट कर मैं ,
घर को वापिस आता ,
इंतज़ार में बैठी माँ की ख़ुशी ,
देख मैं भी खिलखिलाता ।

बस अब यही उसकी ज़िंदगी बन गई ,
भूल हर दर्द मुझ में खो गई ,
एक रोज़ सूरज पहले आ गया ,
देख जिसे मैं घबरा गया ।

ख़ामोश थी जिसकी आँखे ,
होंठों पर ना थी कोई हँसी ,
और ना ही थी हाथों में छड़ी ।।


शायद माँ अब दूर ... बहुत दूर जा चुकी थी ।।

Sunday, April 28, 2019

ग़ुस्ताख़ दिल


खुली जो आँख इतनी रात अंधेरे ,
आँखो से छलक रहे थे आँसु मेरे ,
ख़्वाब टूट कर बिखर चुके थे ,
हमसे अब वो भी रूठ गये थे ।

दिल में लिए भार अब सताने लगे ,
लगा मालूम जबसे वो जाने लगे ,
करते थे बेइंतहा मोहब्बत जिससे ,
उसकी यादों को हम मिटाने लगे ।

तेरे गालों पर तिल , होंठों पर शराब ,
मुस्कुराती निगाहे , मेरी नियत ख़राब ,
वो ज़िंदगी आँखों से गुज़र कर जाने लगी ,
तेरी हँसी अब रुलाने लगी ।

मख़मल सा लगता था बिस्तर जो ,
बैग़ैर तेरे चुभने को आता है ,
होती नहीं मौजूदगी तेरी  ,
मायूस हो कर दिल फिर सो जाता है ।

तेरा हर एहसास , तेरी हर याद ,
हम ख़ुद में छिपा लेते ,
गर कह देती एक और दफ़ा ,
खुदा से भी तुझको चुरा लेते ।

ख़ैर एक और सुबह आने को है ,
ये रात , तेरी याद और ये लम्हे ,
सब बीत जाने को है ,
मोहब्बत एक दफ़ा फिर हो जाने को है ।।

Saturday, April 6, 2019

एक अजनबी


शाम ढल कर रात हो चली ,
पहली दफ़ा जब निगाहे उनसे मिली ,
हम आ रहे थे छोड़ कर उम्मीद जहाँ ,
दे रही थी हिम्मत किसी अजनबी को वहाँ ।

देख उसकी इस अदा को ,
हम एक ज़ुल्म कर बैठें ,
पलट कर देखा था ख़ुद को भी कभी नहीं ,
लौट कर उस रास्ते पे उसके क़रीब जा बैठे ।

पिले गुलाबी सूट में सज कर ,
मानो अप्सरा आन पड़ी थी ,
खुली ज़ुल्फ़ और उनसे ढकीं निगाहे ,
देख जिन्हें धड़कने बड़ रही थी ।

हो गई दूर नज़रों से गायब ,
फिर भी ख्याल मन को आ जाते ,
अजनबी सूरत से ख़ूबसूरत सीरत ,
मानो एक दफ़ा फिर मोहब्बत करने चले जाते ।

बस अभी छोड़ कर कर जाने वाले थे ,
जिसे एक ख़्वाब मान मजधारे ,
लिये खुले ज़ुल्फ़ और मासूम निगाहे ,
आ गये थे बेहद क़रीब फिरसे हमारे ।

मानो थम सा गया हो सब ,
एक पल के लिये ,
कैसे बतायें हो गये उस अजनबी के हम ,
हर पल के लिये ।।

Friday, March 29, 2019

ग़लतफ़हमी

क़लम में स्याही थोड़ी और दवात ख़ाली ,
अल्फ़ज़लो का सिलसिला अब भी जारी ,
कौन सा रौब्ब , कौन सी ख़ुमारी ,
चलो दूर कर जाते है ग़लतफ़मी तुम्हारी ।।

मिल कर बिछड़ने जाना का ग़म ,
उन्हें अक्सर सताता है ,
प्यार को सदियों की ज़रूरत नहीं ,
एक पल में हो जाता है ।

कौन कहता है टूट कर दिल बिखर जाता है ,
ख़ून बन आँसू बहने को आता है ,
होती है बेताबी कुछ इस क़दर ,
टूटने से जादे दिल लगने का डर सताता है ।

होती है मुलाक़ात जब भी उन निगाहों से ,
इश्क़ छलकने को आता है ,
भूल कर दर्द और उस दिल को ,
फिर वो मोहब्बत करने लग जाता है ।

कभी जो लगे अल्फ़ाज़ महज अफ़वाह ,
एक दफ़ा उस दिल से मिल आना ,
धड़कता है जो सिर्फ़ ख़ातिर तेरे ,
उफ़्फ़्फ़्फ ... ये ग़लतफ़हमी ....
बेहतर होगा इसे भूल जाना ।।

Thursday, February 14, 2019

चलो मोहब्बत कर के आते है


हर रोज़ फ़िज़ा में घुलते ख़ुशबू ,
अक्सर बदल से जाते है ,
कभी महकता है गुलाब , कभी चमेली ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।

मिलता है सुकून कभी बाँहों मे ,
कभी कंधो पे सो जाते है ,
अक्सर बदले सुकून के साथ ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।

रातों को जगना अब भी जारी है ,
कभी साथ तेरे कट जाते थे जो जल्दी ,
अब भारी लगते जाते है  ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।

रूठ कर मान जाते कभी ,
कभी मान कर रूठ जाते है ,
इरादतन अंदाज़े दिल का क्या ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।

मिल जाता हर दफ़ा दिल सच्चा ,
बस साथ उसका झूठा हो जाता है ,
फिर तलाश में दिल के  ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।

कभी सीरत का देते हवाला ,
कभी जिस्म जादू चला जाता है ,
सूरत तक जाने की फ़ुर्सत कहा ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।

पिछली दफ़ा से गहरा है मेरा प्यार ,
हर बार यही क्यू लगता है ,
बदलते दौर में जिस्म , जान और ज़िंदगी ,
नहीं लगता कोई एक सच्चा है ..!

ख़ैर छोड़ो आओ फिर तलाश में ,
इरादतन लग जाते है ,
वजह जो भी हो ,
चलो मोहब्बत कर के आते है ।।

Tuesday, November 6, 2018

महल - ऐ - दिल

दिल पे पत्थर रख कर ,
हम एक महल बना रहे थे ,
हीरों से सज़ा कर ,
उसे दुल्हन बना रहे थे ।

कुछ दूर नो निकले थे अभी ,
हम पीछे आ रहे थे ,
धड़कनो को महल की ख़ातिर ,
आहिस्ता से धड़का रहे थे ।

तभी शाम होने को आ गई ,
अँधेरा संग जो ला गईं ,
लगा अब वो जगमगा उठेगी ,
रोशन इस पल को ख़ुद करेगी ।

तभी ज़ोर का एक झटका आया ,
दिल से टूट कंकड़ , जा महल से टकराया ,
हीरा नहीं शीशा था वो ,
तब जा कर ये दिल समझ पाया ।

आज भी जब कही अंधेरे में ,
कुछ भी चमकता पाता हु ,
टूटना मत ऐ दिल ,
बस यही समझाता हु ..।।

फिर हर बार की तरह ,
दिल पर पत्थर रख महल बनता हु ..!!

Thursday, November 1, 2018

ज़िक्र

उठ कर बस अभी कुछ दूर ,
जब मै चला था ,
जा उसी पल कल से ,
मै मिला था ।।

आज भी निशा क़दमों के तेरे ,
नज़र बहुत ख़ूब आते है ,
जब भी उन रास्तों पर ,
हम निकल जाते है ।।

अब ना आती है ख़ुशबू शमा में ,
ना ही होता वो गुलज़ार ,
चंद गिरे पत्ते और ख़ामोश तितलियाँ ,
कर जाती दिले इजहार ।।

रुक जाते अब हार कर ,
बस जो तेरा ज़िक्र ना आता ,
खोने को बहुत है अब भी ,
जो ये दिल ना समझाता ।।

और जब गुफ़्तगू करने लगी ज़िंदगी ,
फिर एक बार ,
हुआ ज़िक्र उनका ,
जिसने कर दिया मोहब्बत को गुलज़ार ।।

लेकिन अब भी ..,
ज़िक्र जब भी तेरा आता है ,
इश्क़ करने को ,
ये दिल चला जाता है ..।।

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Wednesday, October 3, 2018

भूल

पहली दफ़ा चला था दिल ,
थाम उसके धड़कनो का साथ ,
रुकते रुकते रुकने लगी ,
ज़िंदगी और लौटं आने की आस ॥

लगा सब ख़त्म होने को तयार है ,
झूठा उसका प्यार है ,
और फ़रेबी मेरा भी दिल हो चला ,
ना जाने किन राहों पे खो चला ॥

बस अब और इंतज़ार नहीं होता ,
भूल से भला कौन दिल रोता ,
मोहब्बत उसकी रची कहानी थी ,
सच्ची थी मेरी , मुझे निभानी थी ।

आज भी हर दिल में ,
तेरे धड़कन को ही पाती हु ,
भूल से भी भूल कर ,
भूल नहीं उस भूल को भूल पाती हु ॥

कई दफ़ा मिला इन धड़कनो को साथ ,
था जिनमे एक ख़ुशनूमा एहसास ,
पर फिर मैं भूल कर गयी ,
अंजाने में उस एहसास से दूर रह गई ॥

Thursday, September 20, 2018

कल आज कल

आज लग रहा है ,
कल आया ही क्यूँ था ,
खोने को साथ ,
सब कुछ लाया ही क्यूँ था ।

कही हर कोई चिल्ला रहा है ,
कही जायज़ गरिया रहा है ,
कही कोई मुस्कुरा रहा है ,
बस हालात को ये दिल समझ नहीं पा रहा है ।

लग रहा मानो सब छूट गया ,
रिश्ता ज़िंदगी से रूठ गया ,
हाल कर बैठे मोहब्बत में ऐसा ,
देखा भी ना जाये जैसा ।

अब तो कोई मनाने भी नहीं आता ,
नींद से जागने भी नहीं आता ,
बस ख्याल मे अकसर मिल जाते है ,
बस फिर कही हम उठ पाते है ।

ख़त्म कर तो हम एक पल में दे दास्ता ..
पर हार नहीं माना है ,
जीत कर आज कल को ,
फिरसे मुस्कुराना है .. ।।

Tuesday, September 11, 2018

खौफ

मुश्किलों के दौर से ,
चल रही थी ज़िन्दगी ,
थक रही थी .. रुक रही थी ,
दौड़ रही थी ज़िन्दगी .

कल से हर पल जा ,
मिल रही थी ज़िन्दगी ,
थोड़ी सहमी , थोड़ी डरी ,
कही जा पड़ी थी ज़िन्दगी .

खौफ के मंजर से ,
जब भी हो रहा था वास्ता ,
मानो खो जा रही थी ,
ज़िन्दगी अपना रास्ता .

वो रात वो दिन ,
आज भी डराते है ,
सोच जिसके चंद लम्हो को ही ,
हम सहम जाते है .

जंग हार कर भी ,
जी रही है ज़िन्दगी ,
जबसे हो रही धीरे धीरे ,
हिम्मत से उसकी बंदगी ..II