Saturday, October 10, 2020

इश्क़ तो है

माना की इश्क़ में मुश्किलें है बहुत ,

पर करना भी ज़रूरी है ,

ख़ातिर रखने को किसी का दिल ,

किसी का तोड़ना भी ज़रूरी है ।


है एतबार इश्क़ पर उसके इतना ,

हम सब लूटा बैठे है ,

तोड़ कर अपनी ही ख़्वाहिशों को ,

उसकी ख़ुशियों को ही ख़्वाहिश बना बैठे है ।


ना रास्तों का पता ,ना ही कोई ठिकाना ,

अजनबी से लोग और दिल अंजाना ,

फिर भी पैरों के निशा तलाश कर ,

ढूँढ रहा दिल कोई अपना दीवाना ।


ग़ौर से ग़ैर को देख कर भी ,

नज़रें अक्सर लड़ा लिया करते है ,

अजनबी है बहुत महफ़िल में ,

अक्सर दिल चुरा लिया करते है ।


इश्क़ में उलझ कर हर एक दिल ,

किसी रोज़ क़ुर्बान होता है ,

किसी से होती है बेपनाह मोहब्बत ,

तो कोई इश्क़ बेवफ़ा , बदनाम होता है ।


इश्क़ तो हर दिल को होता ,

कभी हँसता कभी रोता है ।।

Thursday, September 24, 2020

कब्र

जो ना मिली होती दो गज़ ज़मीन ,

और मिट्टी की चादर ,

कही होते पड़े लावारिस ,

लिये जिस्म पर ज़ख़्मों के सागर ।


ना आया था कोई पहले मिलने ,

मेरे मिट्टी के ऊपर वाले कब्र में ,

था पड़ा सुनसान वो भी ,

ज़िंदा लाश के मरने के सब्र में ।


थी जान बाक़ी कुछ ,

और उम्मीद तेरे लौट आने की ,

अनगिनत दिये अंजाने ज़ख़्मों पर ,

मरहम लगाने की । 


ख़ैर मौत से पहले कब्र पर ,

कौन ही है आता ,

ज़िंदा पड़े अनगिनत क़ब्रों में ,

लाशों से कौन ही दिल लगाता ।


आज वो बैठी है मेरे कब्र के पास ,

भीगी पलकें और थोड़ी उदास ,

फेर रही वो ऊँगलियाँ कब्र पर ,

और फ़ुल के मरहम लगा रही ।


उसके इस अंजाने अन्दाज़ से ,

मानो ज़िंदा होने का दिल करता है ,

क्यूँ अक्सर ज़िंदा रहने पर ,

इतना प्यार नहीं मिलता है ।


अब मेरी रूह भी तुझ जैसे ,

किसी और जिस्म की जान हो गई ,

मेरे इस जिस्म से ,

वो भी अनजान हो गई ।


मेरी कब्र पर लौट कर फिर आना कभी ,

सिर रख कर सो जाना कभी ,

होगा मालूम शोर धड़कनो का ,

गर उन्हें सुन पाना कभी ।।

Sunday, September 20, 2020

बेहतर

बेहतर ही होता जो ना आते तुम ,

मुस्कुरा कर दिल ना चुराते तुम ,

ना ही होती कोई उम्मीद ख़ुद से ,

ना ही उसे फिर से तोड़ पाते तुम ।


पहली ही मुलाक़ात आख़िरी क्यूँ ना हुई ,

क्यूँ वक़्त ने फिरसे था मिलाया ,

दूर था हो मीलों मुझसे अब तक ,

फिर था ज़िंदगी के क़रीब आया । 


ना ही आँखों से अब होती बातें ,

ना ही हम उन्हें अब पढ़ पाते ,

ना ही बेताबी है मोहब्बत में ,

ना ही शिद्दत से उन्हें वो निभाते । 


मिल कर भी मीलों दूर खड़े है ,

जान कर भी अजनबी बने है ,

बेहतर ही होता जो ना मिलते ,

शायद यूँ ना हम कहते ।


ख़ैर इस ज़िंदगी का क्या अब ,

पर अगली ज़िंदगी बेहतर बनायेंगे ,

होगा शायद बेहतर ,

इस दफ़ा जो तुझे भूल जायेंगे ।

Wednesday, September 2, 2020

हद

ये जो इश्क़ है ना तुमसे ,

हद में नहीं हो पाता ,

यूँ बैठी हो जाकर दूर कही ,

कोई पता भी नहीं बताता ।


तेरी हँसी की हो गूँज ,

या निगाहें क़ातिलाना ,

कमबख़्त इश्क़ क्यूँ है ,

किसी हद से अनजाना । 


माना की मिलना हुआ नहीं ,

मिल कर भी कई बार ,

हद में थे नहीं कभी तुम ,

कभी हमारा प्यार ।


धड़कन ने भी कहाँ दिल से ,

हद में धड़काया करो ,

बेवजह ही नहीं अक्सर,

साथ छोड़ जाया करो ।


कैसी है जीद तेरी ,

और कैसा मेरा पागलपन ,

हद में रह कर करो मोहब्बत ,

ए जानेमन ।।

Saturday, August 29, 2020

महसूस

आज के इस अकेलेपन में ,

जब रिश्ते टूट रहे ,

मिल रहे कुछ नये पराये ,

और कुछ अपने पुराने छूट रहे ।


हर बदलते शाम के साथ ,

चाँद भी कुछ अनजान है ,

कभी चमकते जुगनू ,

कभी तारों से रोशन होता आसमान है ।


रात हो अँधेरी, या ,

हो उजालों का पहेरा ,

एक ख़ूबसूरत ख़्वाब ,

होता एहसास और गहरा । 


जुगनु ,

मीलों दूर कहीं खो गये तुम ,

दिन के उजाले में सो गये तुम ।


बस इस उजाले और अँधेरे में ,

उलझे हुए लाखों जज़्बात है ,

महसूस होती मौजूदगी जिसकी ,

वो धरती और मैं आकाश हैं ।

Friday, August 14, 2020

क़रीब

मोहब्बत हो ग़ैर की तुम ,

तुम मेरी मोहब्बत हो ,

शाम हो अंधेरी सी तुम ,

मेरी जुगनुओं सी मोहब्बत हो ।


समझना नहीं आसान तुमको ,

तुमको समझाना है नामुमकिन ,

मोहब्बत की फ़रियाद लिये बैठी तुम ,

और गिनते हम हर गुज़रता दिन । 


कभी हम पास , कभी तुम दूर ,

कभी हो वजह , कभी नामंज़ूर  ,

कभी वो लम्हे , कभी तेरी यादें ,

कभी तेरे वादे , कभी हम आधे ।


तेरी ख़ुशबू हो या तेरा एहसास ,

तेरी तिरछी निगाहे या बेहद पास ,

तेरा हँसना या हँसाना ,

मुश्किल है , पर , है तो निभाना ।


क़रीब तेरे जिस्म के नहीं ,

तेरी रूह के पास आना है ,

बेवजह ही सही ,

पर हर मर्ज़ की दवा बन जाना है ।


माना की मुश्किल होगी समझने में ,

पर समझ कर दिखाओ ,

क़रीब हो कर भी होते है दूर जो ,

हाले दिल कभी उनसे पुछ आओ ।


मोहब्बत है कोई और तुम्हारा ,

मोहब्बत हो मेरी तुम ,

हो कर भी एहसास क़रीब दिल के ,

धड़कने है गुमसुम ।।

Saturday, August 8, 2020

ख़फ़ा

तेरी हँसी मे बसी ख़ुशी ,

और आँखों में ग़म ,

मंज़र है बिछड़ने का आज ,

और वक़्त है काफ़ी कम ।


अनगिनत सवाल और चंद जवाब ,

अधूरे ख़्वाब और अल्फ़ाज़ ,

कैसा साज कैसा राज़ ,

चंद लम्हों का अधूरा साथ ।


इतने बरसात के बाद भी ,

क्यूँ इश्क़ में भीग नहीं पाये ,

मानो मिलने के लिये नहीं ,

बिछड़ने के लिये हर बार पास आयें ।


क्यूँकि अब तय है सफ़र ,

और मंज़िल भी बेहद पास है ,

दूर होते हम और हमारी यादें ,

शायद अंत का ये आग़ाज़ है ।


कभी हर लम्हे में थे हम ,

आज ख़्यालों में भी नहीं ,

कभी जवाब थे हम ,

अब सवालों में भी नहीं ।


कभी सुबह होती थी हमसे ,

और हमसे ही रात ,

ग़म की वजह भी हम ,

और ख़ुशियों की सौग़ात ।


आख़िरी दफ़ा टूट कर मुझसे ,

उनसे जुड़ने वो जा रहे है ,

हम हैं ख़फ़ा ज़िंदगी से ,

और वो मुस्कुरा रहे है ।

Saturday, July 25, 2020

ख़ुशनसीब

मैं ख़ुशनसीब हूँ आज मालूम पड़ा ,
जब मौत चौखट पर थी आ खड़ी ,
जाने की बेला अब थी पास आ रही ,
ज़िंदगी से कही दूर मुझे ले जा रही । 

बस पलट कर देखा उन चेहरों को ,
बग़ैर मेरे कैसे वो मुस्कुराएँगे ,
छूट कर जब इन ज़ंजीरों से ,
हम किसी और शहर निकल जायेंगे ।

क्या मालूम है इन्हें भी ये सच ,
शायद हाँ , पर शायद बिलकुल नहीं ,
एक रोज़ मौत इनके भी चौखट पर आयेगी ,
छोड़ यादें , लम्हे , वादे संग इन्हें ले जायेगी ।

क्या ये चेहरे तब भी यूँ मुरझाये होते ,
आँखों में आँसु , दिल में दर्द दबाये होते ,
मैं तो ख़ुश हुँ मेरे जाने का ऐलान हुआ है ,
बेवक्त नहीं कोई आख़िरी फ़रमान सुना है ।

वरना कहाँ मौत बता कर ,
ऐसे चौखट पर आती है ,
ना सुनती कोई कहानी ,ना वक़्त दे पाती है ।
बस एक पल में लेकर रूह ,कहीं गुम हो जाती है ।।

मैं ख़ुशनसीब हु आज मालूम पड़ा ..!!

Tuesday, July 21, 2020

शोर

मालूम नहीं ज़िंदगी को , मंज़ूर क्या ,
पर कुछ तो , ख़ाली ख़ाली सा लग रहा ,
रात के अंधेरे में , चमकते थे जुगनू कभी ,
अब हर ओर अँधेरा बस रहा । 

पास हैं सब मेरे दिल और जज़्बात के ,
फिर भी कुछ , कमी सी लग रही ,
ख़ामोशी और अंधेरे में ,
जल्दी आने की ,जंग चल रही  ।

वक़्त भी हर रोज़ ,एक सा ही गुज़र रहा ,
कभी मुस्कुरा , कभी गुम रहा ,
मालूम नहीं इतनी क्या है उलझन ,
जो कभी दिल सहम , तो कभी ठिठुर रहा ।

ख़्यालों मे शोर इतना की , सब सुनाई देता है ,
बेवजह ही अक्सर , वो रास्ते मोड़ लेता है ,
ना होती कोई मंज़िल , ना कोई मुसाफ़िर ,
फिर भी अनजान रास्तों पर , चल देता है ।

ना होता पता मंज़िल का ,
और ना ही होता है कोई ठिकाना ,
लोगों से भरा ये शहर ,
लगता है ना जाने क्यूँ वीराना .. अनजाना ।।

Monday, July 20, 2020

हिचकी

मुझसे जुड़ी एक ज़िंदगी ,
और भी है साथ मेरे ,
छिपते छिपाते चलते मेरे अपने ,
है जो हर पल खुलेआम पास मेरे ।

कभी वो ज़िंदगी रंगो में उलझ जाती ,
कभी वो ख़्वाबों के टूटने पर बिखर जाती ,
कभी तुम्हें मंज़ूर नहीं होती वो साथ मेरे ,
कौन बताये ,
ज़िंदगी भर वो रहेगी थामे हाथ मेरे ।

क्या दिल भी देखता है कोई ,
दिल लगाने के लिये ,
ज़िंदगी भर साथ निभाने के लिए ,
संग मेरे ,
मेरी ज़िंदगी को भी अपनाने के लिए ।

माना की आसान नहीं होता सफ़र ,
तीन जिंदगियों का हर बार ,
पर क्यूँ भूल जाती है ये दुनिया ,
इश्क़ है सबका आधार । 

मुझमे है कमी बस इतनी सी ,
और इतनी सी ही है ताक़त ,
हो मंज़ूर तो ले चलो साथ ,
ना कोई हिचकी ना कोई आफ़त ।

मुझसे जुड़ी है एक और ज़िंदगी ,
ज़िंदगी भर के लिये ।।

Wednesday, July 15, 2020

जंग

ये जंग है ख़्वाबों की ,
ख़्वाबों के संग ,
टूटते बिखरते बिछड़ते ,
बदलते कई रंग ।

हौसला भी है वही ,
और जज़्बा भी ख़ूब ,
मौजूद हर मोहरा मैदान में ,
कोई घोड़ा कोई ऊँट ।

क्यूँकि जीतनी है जंग ,
हर बार हार कर भी ,
बस मैदान में है डट जाना ,
मुश्किल मगर मुमकिन है निशाना ।।

हर सुबह उठ कर ,
ख़्वाबों की ओर दौड़ जाते है ,
क्या हुआ जो नहीं मिली मंज़िल ,
ढूँढने रास्ता फिर सो जाते है ।

बस रहा भरोसा ख़ुद पर ,
हौसला नहीं डगमगायेगा ,
ख़्वाबों को सच होने से ,
कौन रोक पायेगा ।

Tuesday, June 30, 2020

चमन की बहार

ये इश्क़ की ज़ंजीरो में ,
बँधा एक दिल है ,
छोटी सी ख़्वाहिश जिसकी ,
दूर बहुत मंज़िल है ।

ख़्वाबों से ख़्यालों तक का सफ़र ,
था बहुत शानदार ,
ख़ूबसूरत वो और उसकी अदायें ,
खिच ले मुझे अपनी ओर हर बार ।

सच से बस उतना ही था फ़ासला ,
जितना वो हमें पहचानते थे ,
आज भी हम थे उनके लिये अनजान ,
बस इतना ही वो जानते थे ।

दूसरों की आँखों में ,
बसी उसकी तस्वीर ,
कैसे नज़रों से उतार लाते ,
कैसे ख़्वाबों को तोड़ पाते ।

मोहब्बत हमने भी की थी ,
पर हाले दिल किसी बताते ,
ख़्वाबों में है सिर्फ़ साथ मेरे ,
कैसे बस इतना सा सच सुनाते ।

धड़कनो से माँगा उधार हो तुम ,
सच्चा प्यार हो तुम ,
ख़्वाबों में ही सही ,
चमन की बहार हो तुम ।। 

Monday, June 15, 2020

मेरे मौत की ख़बर

जिस रोज़ मिले ख़बर मेरे मौत की,
चंद शब्दों के फ़ूल छोड़ जाना।
रिश्ता जो निभाया ना कभी,
उसपर इमोटिकॉन्स वाले आँसू बहाना।।

ज़िंदगी के मतलब को,
मर कर कैसे जताते हैं ।
सीख लो कला ये उनसे,
जो मौत के बाद ज़िंदगी मे आते हैं।।

था परेशान बहुत उस दौर में,
कहानियाँ भी थी अनगिनत ।
पर किसको सुनाता,
ज़िंदा रहने पर मिलने कौन है आता।।

चलो अब तो वो शोर भी,
दफ़्न मेरे अंदर ही हो गया।
मौत की बाँहों मे जाकर,
जिस पल मैं सो गया।।

ज़िंदगी थी साथ ज़िंदगी के ,
काफ़ी अरसे तक मेरे ,
भूल जायेगा चंद लम्हों में वो ,
जो था नहीं कभी साथ मेरे । 

ख़बर मेरे मौत की भी पुरानी होगी,
धुँधली जिसकी कहानी होगी।
फिर आँसू बहाने को वो तैयार होंगे,
मौत के पास जाने को ना जाने ,
कितने और बेक़रार होंगे।।

गर हो सके तो मेरी मौत पर ,
ना आंसू बहाना।
वो चंद लम्हा ही सही ,
किसी अपने को दे आना ।

वरना जंग-ए-ज़िंदगी से,
और कहानियाँ मौत की।
आये दिन सुनते जाएंगे ,
चंद शब्दों वाले फ़ुल वो छोड़ जाएंगे।।