Thursday, March 25, 2021

अलविदा

गर आंखे होती है सच्ची ,
तो सच ही देखा होगा ,
खूबसूरती छिपी निगाहो में उनके ,
सब ने देखा होगा ।

पर देखा जो हमने ,
वो मोती के आंसू थे ,
गाल लाल और सिसकियों से ,
लगते वो खूबसूरत काफी थे ।

है मासूम वो ,
या हम गलतफहमी पाले बैठे है ,
ये तो वक्त बतायेगा ,
पर बेवजह अब मोती ,
आंखों से नहीं बहने को आयेगा ।

कब कैसे और क्यों शुरू हुआ ,
मुश्किल है ये बता पाना ,
अजनबी बेशक हैं हम आज भी ,
कल क्या हो किसने जाना ।

खत्म होना ही लिखा है गर नसीब में,
हमे ये भी मंजूर है ,
बहते मोती हमें मुबारक ,
तेरा ना कोई कसूर है ।

गर नहीं हो तुम मेरी तकदीर में ,
हम यकीनन लौट जायेगा ,
वादा है  ,
मेरी आंखे से अब मोती ,
आप बहा ना पाएंगे  ।

यकीनन हम दूर बहुत दूर ,
वक्त के साथ चले जायेंगे ,
लौट कर शायद फिर कभी ,
हम ना आ पायेंगे ,
दूर बहुत दूर चले जायेंगे ।

अलविदा

Wednesday, March 24, 2021

खता


वो शाम आई ही क्यों ,
जब अंधेरे में उसे गुम होना था ,
उसे कुछ हद तक पहचान ही क्यों ,
जब कुछ पल में ही अंजान होना था ।

चंद रोज और अनगिनत लम्हें ,
हम बेहद बदल रहे थे ,
लगा नहीं हम , हम थे ,
शायद अब संभल रहे थे ।

नज़र हटाना तस्वीर से जिसके ,
मुश्किल हो चला था ,
खुशियों से संवारने की थी जिद्द जिसे ,
वो खफा कर चला था ।

बिछड़ने का गम नहीं ,
क्योंकि था वो कोई हमदम नहीं ,
गम हैं उसके बेवजह रूठ जाने का ,
अंजाने में ही सही .. दिल दुखाने का ।

अनगिनत सवाल अब भी ,
अपने जवाब तलाश रहे है ,
कुछ तो हुई है यकीनन खता ,
वो बिन कुछ कहे दूर जा रहे हैं ।

खैर,

कोई अपना तो ऐसे जाता नहीं ,
जैसे तुम गए हो ,
एक झटके में ही सब तोड़ कर ,
बेवजह मुंह मोड़ गए हो ।।

Tuesday, March 23, 2021

एकतरफा


यकीनन पहली दफा तो ,
ये मुलाकात ना थी ,
कुछ सच्ची कुछ झूठी ,
जिसमे बात ना थी ।

था तो बस कुछ वक्त ,
और अनगिनत सवाल ,
जो अधूरा ही रह गया ,
जिस पल वो ... खामोशी से कुछ कह गया ।

मैंने सुना भी सिद्दत से उसे ,
और सच भी बयां हो गया ,
जो पहली दफा में ही ना जाने कैसे ,
अजनबी ना रह गया ।

क्यों जिद है उसको अब हंसाने की ,
खुशियां झोली में उसके ... अनगिनत दे आने की ,
हैं तो बहुत "अपने" उसके जो उसे हंसाते है ,
ना जाने क्यों फिर भी हम "खुश" रहने की फरियाद लगाते है ।

अक्सर छोड़ कर अधूरे में ,
रात के अंधेरे में ,
चांद तारों के संग .. वो छोड़ जाते है ,
बिन कुछ कहे .. मुंह मोड़ जाते है ।

माना की हु नहीं कोई अपना ,
और गैर सा तुम बनाते हो ,
अधूरे में ना जाने क्यों छोड़ ,
जब अक्सर चले जाते हो ।

कहना था कुछ तुमसे ,
पर शब्द नहीं है ,
उलझ रहा मैं एहसासों के जाल में,
शायद अब सच यही है ।

गर है तो ऐसा क्यों है ,
है तो आखिर वो "अजनबी" है !!

Sunday, March 21, 2021

अधूरा

कुछ खत्म हुए कहानियां की शुरुआत हो तुम ,
अधूरे उलझे और उजड़े जज्बातों की सौगात हो तुम ,
हो बेशक बेखबर कल के सुनहरे मौसम से ,
आज शाम के आंधी के बाद की बरसात हो तुम l

हो तुम अंजान बेशक आज मुझसे ,
पर खुद से तो हर रोज अंजान हो ,
पहचानना मुश्किल है नहीं तुमको ,
पर तुम खुद लिए हो अपनी ,
अधूरी पहचान हो l

सपनों में जीने की आदत लिए ,
नींद से बेहद दूर हो तुम ,
ख्वाबों में सजाए उम्मीदों की ,
पोटली के संग ... मजबूर हो तुम ।

सिर्फ दिल ही नहीं धड़कन भी अब ,
धड़कना छोड़ने लगे थे ,
जिस रोज बिखरते ख्वाबों से ,
तुम मुंह फेरने लगे थे l

तुम पल को चुरा लो कुछ पल के लिए ,
ये पल हर पल मुमकिन नहीं ,
जज्बातों में उलझी तुम हो खुद ,
कोई और निकाले बेवजह ... ये मुमकिन नहीं ।

आइना है गर मौजूद सामने ,
एक दफा निहार आओ ,
श्रंगार जो है अधूरा अब तक ,
लाकर होठों पर हसीं और आंखों में चमक ,
उसे पूरा कर जाओ ।

जाओ बेशक लौट कर जहा जाना है ,
बेवजह ही नहीं खुद को अब सताना है ,
है लिखी खुशिया जिंदगी में गर ,
तो मुस्कुराओ ... मुस्कुराओ !!

Monday, March 1, 2021

उलझन

क्यों बहाना आसूं , 
जब रक्त बह रहा है ,
क्यों ठहेरना एक पल में ,
जब वक्त चल रहा है ।

हर सुबह के बाद शाम भी है ,
खुशियों के कीमत का दाम भी है ,
है गम बेचने वाले भी मौजूद ,
क्योंकि उसके खरीदार भी है ।

थाम लो एक दफा वक्त को कैद में ,
शायद पल भी ठहर जाए ,
खूबसूरत हो लम्हा तो अच्छा ,
वरना शायद वो पल ही वजह बन जाए ।

उलझन लिए नज़रे चुरा रहे है ,
जान कर भी अजनबी बने जा रहे है ,
गर हो उम्मीद कायम खुद में खो जाने की ,
तो गुमनामी से क्यों घबरा रहे है ।

वक्त के साथ सब धूल जायेगा ,
यादों में भी जिक्र ना हो पायेगा ,
बेहतर है अभी मुस्कुरा लेते है ,
कुछ पल ही खुद में खो जाते है ।

Monday, February 15, 2021

मोहब्बत ही तो है

आज शाम के इस अंधरे में भी ,
है उजाला जुगनू के मौजदगी से ,
खुश हूं बहुत यकीनन मैं आज ,
जगमगाते इस रोशनी से ।

है भरोसा कल फिर सुबह होगी ,
रोशनी हर जगह होगी ,
होगी एक उम्मीद तेरे हो जाने की ,
ज़िन्दगी भर साथ निभाने की ।

बदल रहा मौसम और मिज़ाज ,
बड़ रही नज़दीकियों में दूरियां ,
और अनगिनत मजबूरियां ।

तेरे हर ना को हां समझ लेना भूल थी ,
मुस्कुराहट पर टिकी ज़िन्दगी बेफिजूल थी ,
थी नहीं सच्ची गर मोहब्बत मेरी ,
तो शिद्दत से निभाने को क्यों वो मजबूर थी ।

खैर खो कर भी पा लिया ,
मोहबब्त का एक एहसास ,
बिछड़ते रिश्तों में किसी और के ,
आने की लिए आस ।

याद रहे बस इतनी सी बात ...
मोहब्बत ही तो है ,
फिरसे हो जायेगी ,
इस दफा तुम तो अगली दफा कोई और ,
दिल में बस जायेगी ।

मोहब्बत ही तो है ,
फिरसे हो जायेगी ।।

Sunday, February 7, 2021

पहला प्यार

पहली बार मिला जो तुमसे ,

पहली मोहब्बत कर बैठा ,

पहली निगाहों के मिलते ही ,

दिल तुझको दे बैठा ।


लगा था वक्त बहुत बेशक मुझे ,

पर आज भी वो मुलाकात याद है ,

अनगिनत पूछे सवालों के,

रखे जवाब आज भी साथ है ।


वो नन्हा सा दिल जब से धड़का था ,

तुझे मैं हर पल देखता रहता था ,

ना थी वो उम्र दिल लगाने की ,

ना ही तुझमें डूब जाने की ।


पर डूबता गया मैं ,

गुजरते वक्त के साथ ,

कभी भरी मांग मैंने ,

कभी मांगा तेरा हाथ ।


यकीनन हां के इंतज़ार में ,

वक्त गुजरता चला गया ,

मुरझाते फूल को बगिया में ,

मानो जैसे माली छोड़ गया ।


तुम हो गई किसी और की ,

और हम भी कहीं और दिल लगा बैठे ,

पहली ही हो आख़िरी मोहब्बत ,

ये सच हम दोनों झूठला बैठें ।।

Monday, February 1, 2021

मजबूर

है अनगिनत सवाल जिसके ,
मालूम नहीं जवाब उसके ,
फिर भी मुस्कुराती है ,
मजबूर है जरूर लेकिन नहीं दिखती है ।

ख्वाबों का लिए गुलदस्ता ,
और वक्त से मुरझाते फूल ,
नहीं जान पाता कोई ,
आखिर क्यों है वो मजबूर ।

दिल में बस जाना या दिल में बसाना ,
है मुमकिन बहुत और आसान ,
गर देख ले कोई उसकी निगाहों में  ,
मजबूरी में भी मुस्कुराती है वो बेजान ।

खूबसूरत जो बनाना जानती है ,
लम्हों को सजाना जानती है ,
जानती है ख्वाइशों को करना पूरा ,
फिर भी रह जाता हैं कुछ अधूरा ।

मजबूर है या है कोई मजबूरी ,
खुशियों से क्यों है मीलों दूरी ,
गर मिल जाए जवाब बता जाना ,
मजबूरी ना हो तो ,
एक पल के लिए ही सही .. मुस्कुराना ।।

Sunday, January 10, 2021

चेहरा


बहुत से अनगिनत सवाल लिए ,

खुद को खुशियां से सवार रही ,

जुल्फे भी है सुझली सुलझी ,

और बहते काजल की धार नहीं ।


आंखों में है कुछ नमी जरूर ,

और पलकों पर बिखरे काजल ,

संभाले जज्बातों को अपने ,

मुस्कुरा रही वो पागल ।


कल की खुशियां आज नहीं ,

आज की खुशियों का कोई कल नहीं ,

और उलझी जिन राहों में वो ,

उन राहों में मंजिल नहीं ।


खुल के हंसना भूल गई जो,

रोना जिसको याद नहीं ,

लम्हों की मोहताज है जो ,

पल भर भी कोई साथ नहीं ।


अनगिनत जज्बातों के ,

लाखों सजाए वादों के ,

कब तक यूंही चलता जायेगा ,

एक रोज़ तो चहरे से नकाब हट जायेगा ।


बेहतर है कल से ना मांगो कुछ ,

ना कल के लिए कुछ सजाओ ,

है बिखरा जरूर कल या था ,

आज , अभी तो मुस्कुराओ ।


तस्वीरों से बया होती कहानियां ,

अब समझ आने लगी है ,

चहरे पे छिपे जज्बात ,

बया कर जाने लगी हैं ।।

Friday, January 8, 2021

तुम

पहली दफा मिले भी तो ,

हम मिले कैसे ,

अजनबी के महज एक स्पर्श से ,

हम उसके हुए कैसे ?


सफर का सफल होना जरूरी नहीं होता ,

गर साथ लिखा ही कुछ पल का होता ,

होता है साथ तो बस लम्हें और याद ,

और कुछ अधूरे अल्फ़ाज़ ।


तेरा यूं अक्सर नजरों से छेड़ना मुझे ,

बेवजह अरमानों को तोड़ना मेरे ,

डर कर थामना तेरा हाथ ,

और वो आख़िरी मुलाकात ।


था बहुत कुछ जो तेरा हो गया ,

जाने पर बहुत अधूरा रह गया ,

पर साथ जो आज भी है मेरे ,

वो होकर भी तेरा मेरा हो गया ।


अब रास्ते बदल गए ,

वास्ते बदल गए ,

हम भी बदल गए ,

और तुम भी बदल गए ।


बस जो नहीं बदला ,

वो है तुम्हारा गहना ,

तुम्हारी आंखो से नहीं ,

कोई और खूबसूरत गहना ।।

Sunday, January 3, 2021

बेवफ़ा

तेरी हंसी ही काफी थी ,
मेरे जी जाने के लिए ,
तेरी खुशी ही काफी थी ,
मेरे मुस्कुराने के लिए ।

पर जब बिखरा दिल मेरा ,
अनगिनत टुकड़ों में बेवजह ,
तुम एक दफा भी ना आई ,
जान कर ये भी ,
की थी छिपी टुकड़ों में तेरी परछाई । 

बस इतनी सी थी फरियाद ,
हर दफा इस दिल की तुमसे ,
की तुम एक बार मुड़ जाओ ,
एक बार फिर से मुस्कुराओ ।

यकीन मानो अब इस दिल को ,
तेरा जिक्र भी मंजूर नहीं ,
मुस्कुराहट पे मरता था जरूर दिल ,
पर अब मरना बेफिजूल नहीं ।

तुम हो जाओ बेसक किसी और की ,
या कोई और तुम्हारा हो जाए ,
फर्क नहीं पड़ता इस दिल को अब ,
कौन किसके दिल में बस जाए ।

गर मिल जाए मुझसा कोई और ,
दिल मत लगाना ,
बेवजह आदतन तोड़ कर एक और दिल ,
बेवफा ना कहलाना ।।

Friday, December 25, 2020

मौत

क्या यही आख़िरी शब्द होता है ,
या आख़िरी सच होता है ,
क्या यही सब खत्म होता है ,
या महज ये एक प्रश्न होता है ।

कुछ तो जरूर होता है ,
मिलना जिससे एक रोज़ जरूर होता है ,
होता है खत्म जहा सबकुछ ,
या शुरू यादों में जिक्र होता है ।

करीब आकर भी पास नहीं आती ,
मीलों दूर हो कर भी दिख जाती ,
ना होता कोई नाम और कोई पैगाम ,
रूह जब जिस्म से बिछड़ जाती ।

वो आख़िरी पल गर मालूम होता ,
शायद वो कुछ और पल जी लेता ,
कर लेता खवाईशे वो अपनी पूरी ,
रह ना जाती कहानियां अधूरी ।

आज को आख़िरी मान कर जी लेते है ,
कल देखा ही किसने है ये मान लेते है ,
मौत से मिलना तो है नहीं हाथ में हमारे ,
खुल कर ज़िन्दगी ही जी लेते है ।। 

मौत से बैर नहीं ,
ज़िन्दगी से मोहब्बत कर लेते है ।।

Saturday, December 19, 2020

छुईमुई दिल

माना की मंजूर नहीं मोहब्बत ,
शायद इस दिल को अब मेरे ,
बन बैठा ज़ख्मी घायल शेर ,
जो आज बेवजह ।

कौन कहता है की हर ज़ख्म ,
वक्त के साथ भर जाता है ,
कुछ ज़ख्म वक्त के साथ ,
और गहरा पड़ जाता है ।

ना मालूम पता खंजर का ,
ना मालूम पता मंजर का ,
बस ज़ख्मी हो आया है ,
बेवजह ही मुर्झाया है ।

छुई मुई सा होता है दिल ,
आज हकीम ने बताया ,
टूटे और ज़ख्मी दिल को ,
भला कहां था कभी ये समझ आया ।

गर हो सके तो दिल को मेरे ,
मुझ तक ही रहने देना ,
जैसा भी हो एहसास ,
मेरे धड़कनों को सहने देना ।

दिल बीमार है यकीनन आज ,
कल फिर ठीक हो जायेगा ,
आज नहीं लगने को किसी से तैयार ,
शायद कल कोई उसमे बस जायेगा ।