Thursday, July 15, 2021

मलाल

किसी का दिल तो टूटा होगा ,
जब वो दोनों जुड़ रहे होंगे ,
मिट रही होगी किसी के ,
किस्मत की लकीरें ,
जब वो मांग भर रहे होंगे ।

सज रही होगी दुल्हन कहीं ,
जब अपने घर जाने को ,
बेघर हो रहा होगा कोई ,
था सपना जिसका घर बसाने को ।

वो कसमें जो कोई मंडप में खा रहा होगा ,
शायद पहले कही और निभा रहा होगा ,
होते और मजबूत गठबंधन के ,
किसी की उम्मीदें ताउम्र मिटा रहा होगा ।

कोई तो होगा जिसका जिक्र ,
उनके दिल में आ रहा होगा ,
होठों पर होगी मौजूद मुस्कुराहट ,
पर अंदर से दिल को रुला रहा होगा ।

काश मेरे बगल में बैठा शख्स तुम होते ,
ये मलाल फिर उन्हें सता रहा होगा ,
यादों का कारवां जब ,
आंखो के सामने से गुजरता जा रहा होगा ।

काश खाई थी कसमें जो ,
वो निभा पाए होते ,
तो शायद आज तुम ,
मेरे मांग में सिंदूर भर रहे होते ।

इश्क़ मुकम्मल हो हर दफा ,
इतना खुश किस्मत हर शख्स कहां होता है ,
इश्क में होकर भी अक्सर किसी के पूरा ,
वो किसी के इश्क़ से अधूरा होता है ।

इश्क़ मुकम्मल हो हर दफा ,
इतना खुश किस्मत हर शख्स कहां होता है ll

Monday, July 12, 2021

इश्क़ होने लगा था

इश्क़ होने लगा था तुमसे ,
पर अब नहीं कर पाऊंगा ,
बेशक हर लम्हा खूबसूरत था संग तुम्हारे ,
पर अब नहीं उन्हें जी पाऊंगा ।

मैंने की हर कोशिश ,
खुद को मनाने की ,
सिर्फ तेरा हो जाने की ।

पर ऐसा हो नहीं पाया ,
दिल जो करने वाला था तेरे नाम ,
किसी और के नाम कर आया ।

कितना मुश्किल है ये सच बता पाना ,
की तुमसे मोहब्बत होने लगी थी ,
शायद और भी गहरी ,
जबसे तुम दूर रहने लगी थी ।

बदलेगा कुछ नहीं दरमियान हमारे ,
सिवाय अधूरे इश्क़ के ,
बहुत कुछ रह गया था कहना तुमसे ,
मिटा देंगे जिसे हम अपने जिक्र से ।

उसकी गैर मौजूदगी भी नहीं सताएगी ,
गर कभी वो महफिलों से दूर जायेगी ,
क्योंकि रोक पाना मुझे आता नहीं ,
और कोई टोके .. उसे ये भाता नहीं ।

Saturday, July 10, 2021

कंधा

सबके हिस्से में है इश्क ,
बस मुझे छोड़ कर ,
चली गई मेरी इकलौती मोहब्बत ,
जबसे मुंह मोड़ कर ।

मैंने उसे ही रब माना था ,
मेरा मंदिर उसका ठिकाना था ,
मेरी मन्नते भी हुई थी कबूल कई दफा ,
थी दरमियां हमारे जब वफा ।

अब तो महफिलों में भी भटकता हूं ,
सिर्फ उसकी ही तलाश में ,
होता है जिक्र जिसका हर रोज ,
मेरी अरदास में । 

हां ये सच है  दिल लगाने की कोशिश ,
हर दफा जब भी किसी गैर से करता हूं ,
जहन में होता है सिर्फ जिक्र तुम्हारा ,
जब भी मोहब्बत में पड़ता हू । 

पर किसी और का दिल दुखाना ,
लाकर तेरी मौजूदगी का बहाना ,
जायज़ होगा क्या ?

अगर हां तो चलो ,
एक चाल चलते है ,
इस दफा हम भगवान ,
और वो भक्त बनते हैं ।

पर इश्क़ सच में क्या ,
यही सिखाता है ,
तोड़ कर दिल किसी गैर का ,
कौन अपना घर बसाता है ।

Star

Dear Star ,
I know you are very far ,
Shine always ,
Like the way you are .

May with the time  ,
You get name and fame ,
Always remember ,
To be the same .

I don't know the way ,
u inspire many ,
I am trying to write something ,
I have tried any .

I have so much to say ,
In a very stirring way ,
Will speak with my heart ,
May the arrow hit right at the dart .

Till than bye ,
Until I say hi ,
Expect me to be far ,
Dear star .

Friday, July 9, 2021

खिलौना

मैं आज अपने दोस्त ,
मुन्ना की कहानी सुनाता हु ,
आओ सभी बैठ जाओ आराम से ,
मैं फिर बताता हु ।

खेलता था साथ मेरे ,
जबसे मैंने होश संभाला था ,
कभी वो फेकता गेंद ,
कभी मैंने विकेट उखड़ा था ।

कभी आता वो मेरे घर ,
कभी मैं उसके घर जाता था ,
कभी वो मुस्कुराता मेरी खुशियों से ,
कभी मेरे गम से रो जाता था ।

बचपन के इस दौर में,
मैं तो अब भी छोटा बच्चा था ,
पर मुन्ना पता नहीं क्यों ,
अब अक्सर चुप चुप सा रहता था ।

नहीं रोक पाया खुद को ,
घर उसके जाने से ,
था तो घर उसका ही ,
पर लग रहे थे मौजूद चहरे ,
आज थोड़े अंजाने से ।

हैरना हुआ मैं थोड़ा ,
पर कहां कुछ समझ पाता ,
छोटे बच्चे को ,
क्या ही समझ आता ।

दिन बदला और बदले साल ,
फिर एक रोज पहुंच गया ,
जानने उसका हाल ,
तब जा कर देखा मैंने वक्त का कमाल ।


मुन्ना , मुनिया और उसकी मां ,
सब बदल से गए थे ,
उम्र से बड़े ना जाने क्यों ,
वो तीनों लग रहे थे ।

देख मुझे मुन्ना थोड़ा घबराया ,
तभी पीछे से किसी ने आवाज लगाया ,
क्या भाई कितना दोगे ,
कौन सा वाला खिलौना लोगे ?

मैंने झट से पीछे पलट कर देखा ,
कर दिया था जिन चेहरों को अनदेखा ,
वो सब मुझे पहचानते थे ,
शायद मुझे मेरे ही घर में ,
खिलौनों का ग्राहक मानते थे ।

वो घर जहां ,
बेमोल खुशियां थी कभी ,
आज वहा खुशियों के ,
दाम लग रहे थे,
होती थी खूबसूरत मां जहां ,
वहा बच्चे रो रहे थे ।

हां मुन्ना अब व्यापारी बन चुका था ,
अपनो का ही सौदा करने लगा था ,
देख जिसे मैं थोड़ा घबराया ,
पर कुछ भी समझ नहीं आया ।

आखिर क्यों , कैसे , कब ,
इतना क्या हो गया था ,
मेरा मुन्ना कैसे ,
इतना बदल गया था ।

सब कुछ थम सा गया था ,
मानों गुजरता पल ,
अब रुकने लगा था ,
तभी फिर एक आवाज आई ,
और बता यहां कैसे मेरे भाई ।

सुना था तेरी शादी हो गई ,
बुलाया भी नहीं ,
गैरों से पड़ा मालूम मुझे ,
तूने तो बताया भी नहीं ।

मैंने कहा मुझे लगा तू ,
अब इस शहर में नहीं होगा ,
शायद बदलते दौर और आदत में ,
तूने घर भी बदल लिया होगा ।

वो थोड़ा मुस्कुराया ,
और झट से बोला ..

खैर बता कौन सा खिलौना लेगा ,
चलेगा अगर थोड़ा कम भी देगा ,
बस मुफ्त में कुछ नहीं दूंगा ,
कुछ ना कुछ ही सही पर दाम लूंगा ।

चल मेरे साथ ,
थामा उसने मेरा हाथ ,
आ तुझे खिलौने दिखता हूं ,
और दाम बताता हु ।

मैं कुछ भी कहता की तभी ,
एक और झटके ने मुझे झकझोर दिया ,
मुनिया ने आकर ,
जब पूछे से मेरा हाथ मोड़ दिया ।

अरे बाबू तुम तो बहुत ,
चिकने लगते हो ,
पहली बार आए हो क्या ,
इतना चुप चुप क्यों रहते हो ।

वो हाथ कभी जो राखी बांधते थे ,
आज फिर हाथ फैलाए बैठे थे ,
इस दफा खिलौना देकर ,
दाम लेने को कह रहे थे ।

वो पल काश ज़िंदगी का ,
मेरे आखिरी होता ,
जिस पल मुनिया को ,
मैंने खिलौना बनते देखा ।

पर नहीं अभी तो ये ,
महज़ एक शुरुआत थी ,
होनी बहुत सी अनहोनी ,
इसके बाद थी ।

मैंने कहा नहीं नहीं ,
तुमने शायद पहचाना नहीं ,
पगली मैं राहुल हूं ।

वो बोली तो ?
जब मेरा अपना खून ,
करता मेरा सौदा है ,
तुम तो गैर हो बाबू ,
बताओ कितने का करना सौदा है ।

मैं सुदभुद खो कर ,
एक नजर से ,
उसको देखे जा रहा था ,
की तभी मुझसे फिर बोली मुनिया ,
बोलो लेना है खिलौना तो लो ,
वरना बाबू यहां ,
बातों का भी दाम चढ़ता है ।

मुन्ना जोर से मुस्कुराया ,
क्या यार तू अब तक नहीं समझ पाया ,
चल तुझे किसी से मिलवाता हूं ,
तेरे लिए सबसे तजुर्बे वाला खिलौना लाता हु ।

एक छोटा सा कमरा , 
बिस्तर पर सिकुड़ा चादर ,
गीला तकिया ,
और
जलता सिगार लिए ,
बैठी एक अर्धनग्न लाश थी ।

अरे यो तो वही कोख है ,
जिसने मुन्ना को पाला था ,
मुनियां को नौ महीने संभाला था ।

हे ईश्वर ये मुझे क्या दिखा रहे हो ,
क्रूरता के किसी हद तक जा रहे हो ,
खिलौने का सौदा भी ,
किससे करवा रहे हो ।

बस कर मुन्ना अब नहीं देखा जाता ,
जाने दे मुझे यहां से ,
कोई खिलौना समझ नहीं आता ।

हां तो जा किसने तुझे रोका है ,
समझ रहा जिसे तू मां और मुनिया ,
तेरी आंखों का वो धोखा है ।

मैं तो खिलौने बेचता हूं ,
बेहतर दाम लगा कर ,
आज जाना कभी खरीदना हो ,
थोड़ा जाम लगा कर ।

मेरे आंखो से आंसू नहीं ,
रक्त बहने लगे था ,
मैं मौजूद था वहां ,
पर मस्तिष्क में अनगिनत सवाल उठ रहे थे ।

लौटने लगा जब आखिरी बार उस चौखट से ,
सब कुछ फिर जिंदा हो उठा था ,
वो यादें वो बाते वो पल ,
मानों मैं फांसी पर चढ़ रहा था ।

ये मंजर आज भी मेरी जिंदगी में ,
उतना ही ताज़ा है ,
कर के सौदा किसी अपने का ,
जितना बन बैठा वो अभागा है II

बदनाम

इश्क़ को जिंदा रखने के लिए ,
खुद को जिंदा रखना जरूरी नहीं ,
हां यही आखिरी है इश्क़ मेरा ,
कहना कोई मजबूरी नहीं ।

इश्क़ तो खूबसूरत एहसास है ,
पल भर में जो हो जाता है ,
बदलते धडकनों के शोर के साथ ,
चुपके से किसी में खो जाता है ।

मैंने भी किया था इश्क़ ,
मानों कोई दुआ कबूल हो चली हो ,
मैं बन बैठा हूं हीर ,
और मुझे रांझा मिल गई हो l

मेरे हिस्से की मोहब्बत तो सच्ची थी ,
तेरे हिस्से की फिर झूठी कैसे ,
होती थी जिन बातों से खुश तुम ,
उनसे ही रूठी कैसे ।

है आज भी बहुत कुछ खूबसूरत ,
दरमियान हमारे बताने को ,
एक और दफा ,
सिर्फ तेरा हो जाने को ।

खैर चलो इश्क़ को ,
इश्क़ ही रहने दो ,
बेवजह लोगों को ,
बदनाम ना कहने दो ।।

इस पल

उगते सूरज के साथ ,
एक नया इश्क होने को है ,
ढलती शाम के साथ ,
कोई इश्क़ खोने को है ।

इस पल कोई मिल रहा होगा ,
और कही कोई बिछड़ रहा होगा ,
खो रहा होगा कोई जिस्म में किसी के ,
कोई रूह में बस रहा होगा ।

कोई खा रहा होगा कसमें ,
कोई उन्हें तोड़ रहा होगा ,
होगी किसी की पहली मोहब्बत ,
कोई आखिरी बोल रहा होगा ।

तुमसे मैं मिल रहा ,
और तुम उनसे मिल रही ,
महफिल में मौजूद हर शख्स की ,
अपनी ही कहानी चल रही ।

कोई मोहब्बत अमर हो रही होगी ,
किसी की उम्र हो रही होगी ,
होगा कोई महज एक सौदा बस ,
किसी की जिंदगी चल रही होगी l

इस पल में ना जाने कितने पल ,
हर पल गुजर रहे होंगे ,
इश्क़ के मायने और मुखौटे ,
सब बदल रहे होंगे ।

ये इश्क़ भी ,
सौदा कमाल करता है ,
एक पल मालामाल ,
अगले ही पल नीलाम करता है ।

Thursday, July 8, 2021

अंत की शुरुआत

मैं अपने अंत की ,
शुरुआत लिख रहा हूं ,
बिखरने के बाद संभलने की ,
बात लिख रहा हूं ।

मैं लिख रहा हूं वो पैगाम ,
जिसके मायने भी बदल रहे हैं ,
हर दफा ठहर कर ,
बस कुछ दूर चल रहे हैं ।

सज रहा है किला भी मेरा ,
और सेज भी कोई सजा रहा ,
देखते है जश्न में किसके ,
जाता हूं मैं भला ।

मैं लिख रहा हूं एक और खत ,
खबर बताने के लिए ,
बिल्कुल अकेला हु खड़ा ,
हार जाने के लिए ।

गर हार जाऊं किसी गैर से ,
कोई मुझको मलाल नहीं ,
अपनो के जुल्मों पर गम कैसा ,
हर शख्स हारा है अपनो से तुझ जैसा ।

मैं लिख रहा हूं ,
वक्त के दिए हौसले को ,
गर है तुम्हारे हिस्से में कुछ,
बदल देना तुम भी ,
मेरे किसी अधूरे फैसले को ।

मैं अपने अंत की ,
शुरुआत लिख रहा हूं ,
शायद पहली और 
आखिरी बार लिख रहा हूं ।।

Wednesday, July 7, 2021

जिंदा लाश

हम रात में जागते हैं ,

काली रातों को रोशन करने ले लिए ,

अनगिनत मौजूद महफ़िल में ,

भूखों का पेट भरने के लिए ।


कभी गर भर पेट नहीं मिलता खाना ,

वो बहुत सताते हैं ,

मेरे बाद किसी और चौखट पर ,

जा कर भूख मिटाते है ।


किसी का हाल होता बुरा ,

कोई हमें बुरा हाल छोड़ जाते हैं ,

सोचती हूं पूंछू दुनिया वालों से ,

क्यों अपनो का पेट नहीं भर पाते हैं ।


हां मिलता है ना दाम मुझे ,

हर भूखे को खिलाने का ,

रक्त के आखिरी कतरे तक को ,

मुस्कुरा के बहाने का ।


पर आज कल ,

रौशनी में भी अंधेरा है ,

शायद सूरज को बादलों ने घेरा है ।


वरना भूखा जो रात को ,

अक्सर जगाता था ,

दिन में मुझे कभी ,

नहीं वो सताता था ।


अब अक्सर बेवक्त चला आता है ,

फर्क भी नहीं पड़ता उसे ,

गर खाने में वो ,

कोई जिंदा लाश खाता है ।


आखिर इतनी भूख ,

कहां से वो लाता है ,

क्या उसके हिस्से का भोजन ,

कोई और खाता है ,

जो आकर यहां वो भूख मिटाता है ।


क्या उसके हिस्से का भोजन ,

कोई और खाता है ll

इश्क़ - एक सफरनामा

 मेरे सफरनामे का ,

एक और इश्क़ हो तुम ,

गर कहूं आखिरी तुम्हें ,

तो पहली नहीं हो तुम ।


हर बार ठहर कर जब ,

शिद्दत से इश्क़ में खोने लगते है ,

बन कर आता है कोई बुरा सपना ,

जिसके बाद फिरसे दूर होने लगते है ।


चांद तारों से करते बातें ,

बीती जो अनगिनत रातें ,

और पहाड़ों से ऊंचे ख्वाब ,

सब अच्छा था ... पर क्या सच्चा था?


हां तुमसे कही हर बात सच्ची थी , 

लौटी चहरे पर मुस्कान सच्ची थी ,

थे मेरे सच्चे आंसू भी ,

और था सच्चा तेरे इश्क का जादू भी ।


खाई कसमें जो तेरी थी ,

माना मोहब्बत को ही था खुदा ,

शायद थी कसमें ही झूठी ,

या था किस्मत में होना जुदा । 


यकीनन पेशेवर दिल तोड़ आशिक़ ,

हो चला है दिल मेरा ,

वरना कौन छोड़ कर यू जाता है ,

जिंदा मोहब्बत को कब्र में भला ।


रही बात तेरे हिस्से के कहानी की ,

वक्त आने पर वो भी बताएंगे ,

जब आखिरी होगी मोहबब्त मेरी ,

दुनिया को सुनाएंगे ।

Sunday, July 4, 2021

इश्क़ तुमसे

कल की ही तो बात है ,
लगता जैसे वो साथ है ,
सब कुछ होता अधूरा है ,
जबतक करता नहीं वो पूरा है ।

पहली दफा नजर नहीं ,
हमारा नजरिया मिला था ,
इश्क़ में बंधने को ,
जब दिल दौड़ पड़ा था ।

हर रोज कुछ नया सा ,
मुझको लगता था ,
जितनी दफा वो ,
इजहारे मोहब्बत करता था ।

मैं उसमे इतने खो गई ,
मालूम भी नहीं चला ,
ताउम्र कब उसकी हो गई ।

मांग में सिंदूर और गले में मंगलसूत्र ,
और माथे पर बिंदी ,
अब सब गवाही देते थे ,
हम कितना उनमें हर वक्त खोते थे ।

पर वक्त के साथ ,
वो भी बदल गए ,
होते साथ हमारे ,
पर जिक्र में किसी और के हो गए ।

हर याद हर साथ हर बात ,
अब जुल्म का रूप लेने वाले थे ,
जिस पर वो हमें गैर ,
और गैर को अपना कहने वाले थे ।

मोहब्बत जो जन्नत सी थी मेरी ,
अब जहन्नुम लगने लगी ,
ताउम्र जिंदा रहने की ख्वाइश ,
मौत से मिलने लगी ।

मैं हार गई खो कर उसे ,
या खुद से जीतने वाली थी ,
था नहीं मालूम जिंदगी को ,
मैं कितनी मतवाली थी ।

आजाद हु आज खुद के जंजीरों से ,
नहीं घिरी मैं किसी भी अंधेरे से ,
इश्क तुमसे और भी गहरा हो चला है ,
आईने में जिस रोज तू आ मिला है ।

Friday, July 2, 2021

दिल दुखा बैठा

अंजाने में ही सही ,
पर आज दिल उसका दुखा बैठा ,
मुस्कुराहट पर कुर्बान सब जिसके ,
चहरे से उसके मुस्कुराहट मिटा बैठा ।

आज सुना पहली दफा ,
अपनी कहानी उसकी जुबानी ,
पर सच झुठला बैठा ,
अंजाने में आज दिल दुखा बैठा ।

उस पल के खुशी और एहसास को ,
चंद लम्हों के बनते खास को ,
मैं एक पल में गवा बैठा ,
अंजाने में आज दिल दुखा बैठा ।

तुमसे कितना कहूं और कैसे कहूं ,
ये सब नया और खूबसूरत है ,
लम्हों में है जिक्र सिर्फ तुम्हारा ,
अल्फाजों से सजी जो मूरत है ।

तुम्हारी तारीफ करने से घबराता हु ,
हर दफा मुस्कुराता हु ,
जब भी तुम्हारे जिक्र में ,
खुद को आखिरी पाता हु ।

हो सके तो माफ करना ,
और मुस्कुराहट लौटा देना ,
हुई गुस्ताखी अंजाने में जो ,
नई सुबह के साथ भुला देना ।।

हो सके तो मुस्कुरा देना ।।

मेरे हिस्से की मोहब्बत

ना मैं तैयार थी ,
ना ही मोहब्बत बेशुमार थी ,
ना थी कोई ख्वाइश अभी ,
जिंदगी भी बेहद गुलजार थी ।

तुम आ गए मेरी जिंदगी में ,
बनकर अधुरे ख़्वाब से ,
उलझते थे खुद से हर दफा ,
मिलते थे जितनी दफा आप से ।

वो पहली रात वो पहली बात ,
वो पहला साथ ,
सब बुरे ख़्वाब सा लगता है ,
हर शख्स अब मुझे आप सा लगता है ।

थे अरमान मेरे भी बहुत ,
मेरे नामंजूरी के बाद भी ,
पर कहां कोई मुझे समझ पाया ,
पहले अपनो ने पराया ,
फिर गैरों ने भगाया ।

एक रोज़ फिर नई शुरुआत ,
सुबह के साथ ,
मैंने दिल को बहुत मनाया ,
था शायद कोई बुरा सपना कल मेरा ,
भूलने का जिसे मैंने मन बनाया ।

तुम आए मेरे जिंदगी में ,
कोई खूबसूरत सा ख़्वाब बन कर ,
मन फिरसे जीने का कर उठा ,
लौटने लगा था भरोसा ,
मोहब्बत से जो था उठा ।

हर सुबह भी तुमसे ,और शाम भी ,
हर जिक्र में तुम ,और तुम्हारा नाम भी ,
बस अब तुमसे मिलने ही वाले थे ,
पर था कहां मालूम हम बिछड़ने वाले थे ।

उस रोज़ खबर आई तुम्हारे जाने की ,
फिर नहीं लौट आने की ,
पर मेरी सांसों और धडकनों से ,
कौन तुम्हें छीन पायेगा ,
सुन कर देखना कभी धडकनों को मेरे ,
तेरा ही नाम आएगा ।।