Sunday, August 29, 2021

झुमके सा इश्क़

ये एहसास क्यों ,
कुछ नया सा शोर कर रहा ,
पहली दफा कोई अजनबी ,
हुबहू आप सा लग रहा ।

ना ही हुआ राब्ता ,
उनके हुस्न से हमारा कभी ,
इत्तेफ़ाक देखो छोड़ कर मुझे,
इस महफिल में उन्हें पहचानते सभी ।

बातों बातों में कुछ बातें ,
उस रोज़ हम उनसे कह गए ,
वो हमें सुनती रहीं खामोशी से ,
और हम दिल में शोर कर गए ।

गुजरते वक्त के साथ ,
दौर भी बदलने लगें ,
उनके झुमके भी धडकनों सा ,
अब कुछ शोर करने लगे ।

ना मिली निगाहें अब तक ,
ना ही दिलों के मिलने का इरादा है ,
अधुरा कुछ नहीं दर्मिया हमारे ,
आखिर फिर क्या आप का इरादा है ।

हुस्न से घायल और कितना करेंगी ,
जरा आप खुल कर बताइए ,
झुमको से मोहबब्त तो लाज़मी है ,
एक दफा झुमका बन कर दिखाइए ।

कितना शोर होगा उस रोज़ ,
जब कभी हवा के झोंके ,
आप से टकराएंगे ,
महकती खुसबू फिज़ा में आप की ,
हमें खामोश कर जायेंगे ।।

Thursday, August 26, 2021

बेखबर

मुझसे भी जादे इश्क़ करने वाला ,
कोई शख्स मुझे मिला था ,
पागल , झल्ला और दीवाना ,
जो लग रहा था ।

उसकी हर एक अदा में ,
अनगिनत कहानियां छिपी थी ,
लबों से रह गई अधूरी बातों को ,
आंखो से जो वो कह रही थी ।

चंद रातों की बातें ,
अब जज़्बात बनने लगे थे ,
अंजाने में ही हम दोनों ,
एक जुल्म कर रहे थे ।

तुमने खाई थी कसम ख्वाबों में ,
सच में जिसे निभा रही थी ,
हो ना जाए इश्क़ मुकम्मल कहीं ,
इस लिए दूर जा रही थी ।

मैं तो इस सच से ,
अब तक था बेखबर ,
लगा छोड़ क्यों गया ,
बिन कुछ कहे हमसफ़र ।

वादा तो किया था उसने ,
ताउम्र साथ निभाने का ,
पर था नहीं तब डर ,
सच में इश्क़ के हो जाने का ।

पर अब कोई शिकायत नहीं ,
ना ही किसी ओर शोर है ,
हम दोनों का ही रास्ता ,
और मंजिल कोई और है ।।

आखिरी तारा

आसमां में एक तारा था ,
चांद का जो सहारा था ,
अब वो भी कही खो गया ,
शायद आकाश गंगा का हो गया ।

ना कभी टूटा वो आसमां में ,
ना कही पर बिखरा था ,
शायद चांद और तारे के बीच ,
आ गया कोई तीसरा था ।

बदलते वक्त और जज़्बात का ,
देखो ये कैसा खेल है ,
तारे की चमक से दोस्ती ,
ना जाने क्यों लग रही बेमेल है ।

एक ही तो था अनगिनत में ,
चांद जिस तारे को पहचानता ,
ठुकरा कर अपनी ही पहचान ,
कह दिया मैं नहीं इस तारे को जानता । 

उस भीड़ में वो तारा ,
ना जाने क्यों गुम हो गया ,
शायद चांद मोहबब्त निभाने में ,
इस दफा पीछे रह गया ।

कम चमकना चांद का ,
तारों को भाता है ,
चांद के फीका पड़ने पर ,
तारा और टिमटिमाता है ।

बदल कर पहचान अपनी ,
तुमने ये क्या कर दिया ,
भीड़ का हिस्सा बन कर ,
चांद को तन्हां कर दिया ।।

Wednesday, August 25, 2021

आखिरी रात

आ ही गई वो रात भी ,
जिसका हमें डर था ,
कल्पना के इस सफ़र में ,
अब मेरा ना कोई हमसफ़र था ।

छोड़ गई मेरे हाल मुझे ,
वक्त पर बुला कर ,
क्या तोहफ़ा दिया उसने हमें ,
एक पल में भुला कर ।

ना अब वो रात हैं ,
ना ही उसमें वो बात है ,
खूबसूरत गुजरते वक्त का ,
कैसा ये सौगात है ।

बढ़ते इंतजार के साथ ,
एहसास क्यों नहीं गुजर रहें ,
हो कर भी जुदा उससे ,
उसे हम अपना क्यों कह रहें ।

ना ही कोई खोज ना खबर ,
ऐसा जुल्म-ए-सितम क्यों ए हमसफ़र ,
क्या तुम लौट कर नहीं आओगी ,
हमें तन्हा यूंही छोड़ जाओगी ।

ना अब कोई खूबसूरत रात होगी ,
ना जिंदगी भर जिंदगी मेरे साथ होगी ,
मालूम नहीं मेरे हिस्से लिखी ,
कौन सी आखिरी रात होगी ।।

Monday, August 23, 2021

डोर

सज संवर कर तुम ,
कल जब सामने आई थी ,
गुजरे वक्त की यादें ,
मेरे जहन में लौट आई थी ।

तेरी आंखो में बसी मेरी तस्वीर ,
बिंदी में सजी मोहब्बत ,
झुमके का शोर और ,
चूड़ियों की खनखनाहट ।

हर पल हर लम्हा ,
भूल पाना मुश्किल लग रहा ,
पहली सी मोहब्बत ,
अब मैं तुमसे कर रहा ।

इतना श्रंगार कर के ,
जब तुमने खुद को सजाया था ,
सच बताना क्या जिक्र ,
सिर्फ मेरा आया था ।

क्योंकि आंखो में तस्वीर मेरी ,
कुछ धुंधली नजर आ रही ,
होठों पर सजी मोहब्बत ,
कुछ और ही बता रही ।

क्या तुम मुझसे भी जादे ,
अब किसी को चाहने लगी हो ,
हर शाम बाहों में बस कर जिसके ,
दुनिया बसाने लगी हो ।

गर हां तो भला मुझसे ,
खुशनसीब कौन होगा ,
तेरी बाहों से बेहतर ,
जन्नत का सुकून और कहां होगा ।

ताउम्र हम दोनों बंधे है ,
एहसासों के डोर से ,
खो कर एक दूजे में ,
दोनों ही ओर से ।।

Saturday, August 21, 2021

कल्पना

देखो मेरे जिंदगी में ,
खूबूसरत कल्पना बन कर ,
ये कौन आया है ,
जो ढेरों खुशियां लाया है ।
 
सुबह भी उसका ही दीदार होता ,
हर शाम उसी से दिले इज़हार होता ,
मेरे गम भी उसके ही होते ,
खुशियों में भला वो क्यों ना होते ।

ना हम करते बातें बहुत ,
ना वो कुछ कहने को आते  ,
हर दफा जब कभी हम ,
जज्बातों में उलझ जाते ।

थाम कर हाथ उसका पहली दफा ,
हम जब उसके करीब आए थे ,
आंखो की शरारत और मुस्कुराहट के ,
असल मायने समझ पाए थे ।

आज वो पहली दफा ,
जब मेरी बाहों में थी ,
ना जाने क्यों लौटने की जिद्द ,
उसके राहों को थी ।

गुजरते वक्त के साथ ,
सब खूबसूरत लगने लगा है ,
कल्पना वाली इस मोहबब्त से ,
इश्क़ होने लगा है ।।

तुम्हारा साथ

तुझमें कुछ तो अलग सी बात है ,
यूहीं नहीं मिला तेरा साथ है ,
शब्दों के इस सौदागर को ,
मिल गई खुशियों की सौगात है ।

अब डर नहीं लगता मुझे ,
तुझे दुनिया को दिखाने में ,
हाले दिल इस दुनिया को ,
खुल के सुनाने में ।

गुजरते वक्त के साथ ,
रिश्ता गहरा होने लगा है ,
बढ़ती दूरियों के साथ ,
वो मेरा होने लगा है ।

महफिल में तेरी मौजूदगी से ,
देखो सब बदल सा जाता है ,
खामोश रहने वाला लब ,
अब शोर मचाता है ।

लड़ते झगड़ते और तुम पर मरते ,
देखा कितना वक्त गुजर गया ,
हर दफा बिखरने पर ,
रिश्ता और जुड़ गया ।

तुम अगर साथ हो मेरे ,
और भला मुझे क्या चाहिए ,
कितनी है मोहब्बत मुझसे ,
जरा खुल कर बताइए ।।

Thursday, August 19, 2021

और तुम

कुछ देर से लौटा था घर मैं ,
और कुछ देर से तुम जागे थे ,
कितने नाजुक से रिश्तों को ,
मजबूती से तुमने बांधे थे ।

मैं हर रोज़ कर के वादा ,
साथ निभाने का ,
हर शाम तोड़ जाता हू ,
हर दफा दस्तक दरवाज़े पर ,
जब बे वक्त दे आता हू ।

तुमने मांगी नहीं कोई ,
और खुशियां मुझसे ,
बस वक्त ही तो मांगा है ,
देखो ना मज़ाक जिंदगी का ,
बस वक्त ही तो आधा है ।

कल जब तुमसे मैं मिला ,
शायद कई अधूरे अंधेरे के बाद ,
अधुरा कुछ नहीं था हमारे दरमियां ,
सिवाए बिखरा मैं और जज़्बात ।

तुम्हारी फेरती उंगलियां ,
और एक नज़र से मुझे निहारना ,
कातिल निगाहें और मुस्कुराहट  ,
खुद को जिनसे संवारना ।

ये सब छूट सा गया था ,
शायद मीत मेरा रूठ सा गया था ,
पर अब और नहीं सताऊंगा  ,
हर दफा अब वक्त पर लौट आऊंगा ।

और तुम .. 
बस ऐसे ही रहना ,
मेरी बाहों में सुकून बन कर ,
जिंदगी भर की खुशियां ,
और मेरी जिंदगी बन कर ।।

शब्दों के सौदागर

मेरे शब्द मेरा जिक्र और मैं ,
सब तो तुम्हारे हो चुके हैं ,
सौदा दिल का अपने ,
हम शब्दों से कर चुके हैं ।

पढ़ना तुम्हें आसान नहीं ,
फिर भी हम पढ़ते जाते हैं ,
बिना इजाज़त के भी ,
अक्सर दिल लगाते हैं ।

क्या कहना है तुमसे मुझे ,
तुमको मुझसे क्या सुनना है ,
बड़ी मुश्किल में है अल्फाज़ मेरे ,
पता नहीं जिन्हें कब तक छुपे रहना है ।

तुम्हें खो जाने के लिए नहीं ,
खुद से मिलवाने के लिए आया हु ,
देखो ना शब्दों के इस शहर में ,
सौदागर बन कर आया हु ।

रौशनी के तलाश में ,
देखो कितना अंधेरा छाया है ,
चांद भी आज आसमां में ,
छिपने को आया है ।

मैं नहीं मेरे शब्द तुमको ,
अक्सर चुरा कर ले जाते है ,
दिल के सौदागर आज कल ,
क्या खूब मोहबब्त निभाते है ।

शब्दों के सौदागर बन कर ,
फिर तेरे शहर में आएंगे ,
इस दफा चांद से रौशनी ,
तारों से मोहबब्त चुरा लायेंगे ।

दिल ने ये भी कहा है दिल से ,
किसी रोज़ दिल तेरा भी ,
हम चुरा कर ले जाएंगे ,
बस रखना यकीन इस सौदागर का ,
लौट कर फिर जरूर आयेंगे ।।

Tuesday, August 17, 2021

साज़

तेरी आवाज़ ही तेरा साज़ है ,
खूबसूरत अल्फाज का राज़ है ,
तेरी बिंदिया ही तेरा गहना है ,
बाकी तेरा क्या ही कहना है ।

तुम पर जचती है खुशी ,
पर रुक नहीं पाती ,
गम से भागती हो दूर ,
पर अक्सर थक जाती ।

है किस्से कहानियां तुमसे भी जुड़े ,
हुए हैं तुम्हारे भी दिल के टुकड़े ,
पर आज भी तो दिल लगाती हो ,
हर दफा जब इश्क़ निभाती हो ।

सुकून के तलाश में ,
हर दफा उसे बेचैनी ही मिली है ,
इश्क़ का मुकम्मल ना होना ही ,
शायद उसकी जिंदगी है ।

रात के अंधेरे से क्या ही डरे वो ,
दिन के उजाले का अंधेरा डराता है ,
हर दफा जब रूह में बसने वाला ,
सिर्फ उसका जिस्म छू कर चला जाता है ।

तू लड़ रही है जिंदगी से ,
या जिंदगी तुझसे लड़ रही ,
खामोशियों के घर में भी ,
तू इतना शोर क्यों कर रही ।।

डिंपल सी मोहबब्त

हम मिले थे बस किस्मत से ,
किस्मत की लकीरें मिटाने को ,
चंद रोज़ की जिंदगी को ,
ताउम्र निभाने को ।

पहली दफा हो या आखिरी ,
सब कुछ नया सा लगता था ,
जब बन कर मेरा साया ,
हर वक्त मेरे साथ तू चलता था ।

आई मुश्किल बहुत और मुसीबत भी ,
पर हाथ कभी हमनें छोड़ा नहीं ,
खाई कसम साथ निभाने की ,
आज तक मुंह जिससे मोड़ा नहीं ।

मांग मेरी सिंदूर से नहीं ,
तुम्हारे रक्त से भरी है ,
चले गए बिन कुछ कहे ,
आखिर क्या हड़बड़ी है ।

मेरा दिल , मेरे जज़्बात और मैं ,
आज भी तेरा ही हुए बैठे हैं ,
फर्क क्या पड़ता है ,
गर जिस्म वो छोड़ बैठे है ।

रूह में ही नहीं सिर्फ ,
मेरे हर हिस्से में तुम बसे हो ,
क्या बताऊं कैसे बताऊं ,
तुम सिर्फ मेरे हो चुके हो ।

मोहब्बत में हासिल करना नहीं ,
उसे जीना होता हैं ,
गुजर जाने पर भी ,
हर किसी का इश्क़ ,
कहां जिंदा होता है ।।



Dedicated to शहीद Vikram Batra Wife ❤️

शहीद

मेरे रक्त से परिपक्त जो ,
निर्मल बहती धारा है ,
देश की मिट्टी मेरी ,
ये वतन हमारा है ।

मैं रण में लड़ने को तैयार सदा ,
मां पर मर मिटने का वरदान मिला ,
देश की हिफजात मेरे हाथों में ,
किस्मत से मुझे ये सम्मान मिला ।

रक्त का आखिरी कतरा भी ,
मां तेरे लिए बहाऊंगा ,
मैं बलिदान देने ,
सदा तेरा बेटा बन कर आऊंगा ।

जंग में हार हो या जीत हो ,
गर मां का भरोसा अटूट हो ,
कौन भला शिकस्त दे पायेगा ,
हार कर भी तू जीत जाएगा ।

शाहिद होने का ,
अब मुझे कोई गम नहीं ,
मां की गोद से बेहतर ,
होगा क्या स्वर्ग कहीं ।

फर्ज़ निभाते हुए कभी ,
गर मैं थक जाऊंगा ,
बस मां की गोद में ,
जाकर सो जाऊंगा ।

रक्त का आखिरी कतरा भी ,
मां की रक्षा में बहाऊंगा ,
होगा सौभाग्य मेरा ,
गर शाहिद कहलाऊंगा ।।

Monday, August 16, 2021

तुम्हारा एहसास

आज दिल से ये कैसा एहसास टकराया ,
पहली दफा में ही जो उसका हो आया ,
कुछ तो अलग सी उनमें बात थी ,
गैरमौजूद हो कर भी वो मेरे साथ थीं ।

बिखरी सिर्फ जुल्फें नहीं ,
बिखरे अरमान भी थे ,
होंठो पर थी झूठी मुस्कान ,
जिससे हमें छोड़ सब अंजान भी थे ।

चंद पल की जिंदगी में ,
जिंदगी पल भर सी लगने लगी ,
फिज़ा जब इस महफिल की ,
तेरी खुशबू से महकने लगी ।

तुम शाम के उस सर्द हवा सी लगती हो ,
हर दफा जब मुझसे गुजरती हो ,
कुछ मचलता है दिल मेरा ,
ऐसा जुल्में सितम तुम हर रोज करती हो ।

तेरे हिस्से का गम नहीं ,
तेरे हिस्से की खुशियां लौटाने आया हु ,
छूट गया था जो कुछ अधूरा ,
पूरा करने आया हु ।

कहने को बचा ही नहीं कुछ ,
सब तो हम कह चुके है ,
एक ही तो था दिल पास मेरे ,
वो भी तुझे दे चुके हैं ।