Wednesday, September 15, 2021

इत्र सा इश्क़

खुशबू थी फिज़ा में ,
तेरी सड़क से हम जब गुजर रहे थे ,
दूर हो कर भी तुम मुझसे ,
इत्र फिज़ा में छिड़क रहे थे ।

तेरे जैसी खुशबू ,
अब मुझसे भी आ रही थी ,
जहनी मोहब्बत को ,
तू सच में जता रही थी ।

देखो खींचा चला आ रहा ,
कैसे मैं तुम्हारी ओर ,
थाम ली है जबसे तुमने ,
मेरे मोहब्बत की डोर ।

वक्त गुजरने पर भी ,
सब ठहरा सा लगता हैं ,
छिप छिप कर रास्तों में ,
अक्सर तू मुझे तकता है ।

जैसे तेरे जाने के बाद भी ,
तेरी खुशबू फिज़ा से नहीं जाती ,
वैसे ही जिस्म से अलग होते ही ,
तू मेरे रूह में बस जाती ।।

पहाड़ों पे सुकून

खूबसूरत से शहर में ,
कोई उस जैसा ही आया था ,
पहली ही नज़र में जिसने ,
कइयों का दिल चुराया था ।

सब बिखरा और टूटा था ,
जबसे साथ उसका छूटा था ,
पर अब वो मुस्कुरा रही थी ,
खुद से खुद को मिलवा रही थी ।

नज़र पड़ी जो पहली दफा ,
कुछ धुंधली वो नज़र आई ,
आंखो में बसा था सुकून ,
मुस्कुराहट में सच्चाई ।

सर्द मौसम में भी ,
कैसी ये गर्माहट थी ,
मखमल का चादर ओढ़े ,
ये किसकी अमानत थी ।

पहाड़ों के इस सफर में ,
आसमां में बादल का पहरा था ,
खूबसूरत सीरत का असर,
इस दफा मुझपर काफी गहरा था ।

सुकून के तलाश में ,
मैं एक सुकून से जा मिला था ,
पहाड़ों की वादियों में ,
जो खुद को ढूंढ रहा था ।।

बिखरी जुल्फें

बिखरी जुल्फें तेरी ,
और उलझते मेरे जज़्बात ,
क्या ही बचा है रखा हमनें ,
सिवाए तेरे वो चंद "अल्फाज़ " ।

आंखे पढ़ना भूल गया मैं ,
जब से तुमको पढ़ने लगा हू ,
अजब है हाले दिल मेरा ,
बस अब तुमसे मिल रहा हू ।

हो रही मोहबब्त आज कल भी ,
मुझे हर सुबह शाम है ,
पर आज कल ना जाने ,
हर इश्क़ में बस तेरा ही नाम है ।

खोल दो दरवाज़े दिल के ,
जो अब तक बंद कर के बैठी हो ,
बड़ी मुश्किल से हो रहा मुकम्मल ख़्वाब ,
जिसे तुम अधूरा जी कर बैठी हो ।

ये लम्हा ये पल और तुम ,
सब अब सुलझने से लगे हैं ,
खुली जुल्फें भी हाले दिल ,
क्या खूब अब कहने लगे हैं ।

आज खुली बिखरी जुल्फों को ,
मैं अपने हाथों से सुलझाऊंगा ,
पहली दफा अल्फाजों को छोड़ ,
खुद तेरा श्रृंगार करने आऊंगा ।।

In My Arms

The wait was longer ,
Than the expected time ,
She justed wanted to be ,
All mine .

It wasn't just you ,
I was all in rush ,
To fall for ,
Our frozen crush .

We were lost in the world ,
And the people around ,
For we live in the world ,
That two of us just found .

It's not just love ,
It's beyond the line ,
We want to be limitless ,
Perhaps All the time .

Her voice kept on killing ,
Me hard from deep inside ,
I was so lost ,
I forget my own vibe .

It's you who is all in me ,
All I am just trying to be ,
Allow me to fall in more ,
Like no one ever did before .

Holding you in my arms ,
Was the best feeling ever ,
I will cherish these moments ,
In my thoughts Forever .

सिंदूर

मांग में सिंदूर और मेंहदी का रंग ,
दोनों कितना खिल रहे थे ,
आईने में हम भी तो ,
एक नई पहचान से मिल रहे थे ।

एक जुल्म मेरी आंखों में ,
अब चिल्ला रहा था ,
तस्वीर किसी और की ,
मुझे वो दिखा रहा था ।

पर ये रास्ते तो बंद मैंने ही ,
अपने हाथों से किए थे ,
भला आज मेरे जहन में ,
क्यों वो लौट रहे थे ।

एक पल में लगा जैसे ,
ये कैसा गुनाह मैं कर बैठी ,
मोहबब्त किसी से बेपनाह ,
किसी और के नाम का सिंदूर लगा बैठी ।

लौट आई मैं छोड़ कर सब ,
अपने महबूब के बाहों में ,
अनगिनत भूले भटके सफर के बाद ,
अपनी जिंदगी के राहों में ।

कितना शांत और सुंदर ,
इस वक्त का मंजर है ,
भीतर मुझमें लहरों से भरा ,
अंतहीन मोहबब्त का समंदर है ।।

इश्क़ का कारोबार

इश्क़ भी एक सौदा ही तो है ,
जिसमें नफा नुकसान वाज़िब हैं ,
मुकम्मल हो जाए तो वाह वाह ,
गर नहीं तो कालिख है ।

गुमनाम रास्ते और अंजाने चहरे ,
आज कल तो बेहद आम हैं ,
इश्क़ में पड़ने ही दिल ,
हो जाता किसी का गुलाम है ।

कीमत अदा भी देखो भला ,
कैसे आशिक़ किया करते हैं ,
कोई करता कुर्बान खुशियां ,
कोई जिस्म की नुमाइश करते हैं ।

आज कल इश्क़ में बिछड़ना ,
देखो कितना भाने लगा है ,
सुबह वाली मोहब्बत किसी से ,
शाम को कोई और ,
दिल धड़काने लगा है  ।

कितना आसान अब इश्क़ ,
और उसके मायने लग रहे हैं ,
हर रोज़ इश्क़ आखिरी कह कर ,
फिर किसी के इश्क़ में पड़ रहें हैं ।

अंधा हैं इश्क़ भी ,
और धुंधला इसका कारोबार ,
बड़ी मुश्किल से मिलता हैं ,
इतने मुनाफे वाला कोई व्यापार ।।

रिश्ता

लगा सब खत्म हो गया ,
जिस पल मेरी मांग में ,
सिंदूर वो भरने को आया था ,
जिसने मुझसे दिल लगाया था ।

आंखे थी नम मेरी और ,
धड़कन खामोश पड़ी थी ,
खुशियों के उस मंडप में ,
बस मैं ही मायूस खड़ी थी ।

देखो मुस्कुराहट और खुशियां ,
सब एक दूसरे को बांट रहे थे ,
एक एकले हम थे जो बस ,
किसी और की राह ताक रहे थे ।

मेरा महबूब मुझे छोड़ कर ,
अब कही जा चुका था ,
मुझसी मोहब्बत वो भी ,
मुझसे अब निभा रहा था ।

लगा सब ख़त्म हो गया ,
एक चुटकी भर सिंदूर से ,
हार गई एक और दफा ,
रांझा अपने ही हीर से ।

इश्क़ को शिद्दत से निभाने वाले ,
अक्सर इश्क़ में अधूरे रह जाते हैं , 
सच्चा हो कर भी इश्क़ जिनका ,
उसे मुकम्मल नहीं कर पाते हैं ।।

अधुरा

बिछड़ने का मजा भला ,
कभी मिलने में मिला है क्या ,
अधूरे इश्क़ से खूबसूरत हादसा ,
आज तक कोई हुआ है क्या ?

सब दौड़ रहे थे जिंदगी में ,
हम भी तो भाग रहे थे ,
भूलने की चाहत में तुझे ,
हर किसी से दिल लगा रहे थे ।

मिली मोहबब्त भी बेशुमार ,
तुझसे दूर जब हम जाने लगे ,
होने लगा था इश्क़ भी अब शुरू ,
मुकम्मल जिसे हम कर जाने लगे । 

पर तेरी एक झलक ने ,
फिरसे मुझे मुझसे उलझा दिया ,
खूबसूरत से उस सफरनामे को ,
मैंने एक पल में झुठला दिया ।

मेरा जिस्म और मेरी रूह ,
अब दोनों में तुम घुल चुके हो ,
अधूरे इश्क़ की अधूरी दास्तां ,
तुम मेरा बन चुके हो ।

भला कैसे कोई ज़हर इतना ,
इस कदर असर कर सकता है ,
असरदार जिंदगी के लम्हों को ,
एक पल में बेअसर कर सकता है ।

तुमसे मोहबब्त इतनी गहरी ,
कैसे भला हम कर बैठें ,
इश्क़ में जिंदा रहने की कोशिश में ,
खुद का कत्ल कर बैठें ।।

Tuesday, September 14, 2021

तेरा जिक्र

दिल तो लगता है अक्सर किसी से ,
पर धड़कनों पर सिर्फ तेरा ही राज है ,
बेशक वक्त दे आता हू महफिलों में ,
घर में तो बस तू ही सरताज है ।

भूल जाता हू हर शख्स को ,
और उसकी कहानियां ,
जब शुरू होती है दरमियां ,
हम दोनों की जिंदगनियां ।

रात के इस अंधेर से पहले ,
तुम मेरे ख्वाबों में आई थी ,
इस दफा पायल के संग ,
झुमके भी ले आई थी ।

आंखे खुली तो देखा ,
तुम्हारा एक पैगाम पड़ा था ,
झुमके थे कुछ रंग बिरंगे ,
जिन्हें तुमने मेरे नाम करा था ।

तुम्हारी मौजूदगी से जिंदगी में ,
सब बदलने लग जाता हैं ,
धड़कनों को भी बस ,
तेरा ही नाम भाता है ।

तुम हो मेरे खुशियों की वो ताबीज़ ,
जो हर वक्त मेरे पास है ,
हार कर भी जीत जाता हूं ,
अटूट मुझपर जो तेरा विश्वास है ।।

Sunday, September 12, 2021

आधा इश्क़

मैं देख रहा तुम्हारी आखों में ,
जो भी आज कल ,
क्या वही सच है हमारा ,
या अभी और बची है हलचल ।

तुम कितनी सादगी से ,
हर सच को बतलाती हो ,
एक ही दिल है पास मेरे ,
हर दफा चुरा ले जाती हो ।

ये बारिश गर फिर बरस गई ,
तो अब रोकना तुम्हें मुश्किल होगा ,
जो कुछ भी है दिल में अब तक ,
लबों से सब ज़ाहिर होगा ।

दिन काटे से भी अब ,
देखो कट ना रहें ,
दूर जाने की कोशिश में भी ,
हम एक दूसरे से बट ना रहे ।

अल्फाज़ का असर ,
कुछ ऐसा उनपर पर चढ़ रहा  ,
हो कर मौजूद कही ,
कही और वो रह रहा ।

बेताबी कहूं तेरी इसे ,
या खुद की बेकरारी ,
रोकने से भी नहीं रुक रही ,
ये दीवानगी हमारी ।

ख्वाइश और तमन्ना के बीच ,
फर्क नहीं कोई ज्यादा है ,
तोड़ना मुश्किल हैं जिसे ,
वो खुद से किया वादा हैं ।

यकीनन अब हद से बेहद ,
होने का हम दोनों का इरादा हैं ,
दरमियान हमारे अब भी
बहुत कुछ आधा है ।।

मैं बदलने लगा हूं

तुमसे मिलना मेरे मुकद्दर में था ,
या मैंने अपनी तकदीर बनाई है ,
तेरी छाव से गुजरा हु जबसे ,
संग मेरे चल रही तेरी परछाई है ।

तुमसे सीख रहा जिंदगी के मायने ,
तुम को ही जिंदगी बना रहा ,
हर सांस में बस रही हो तुम ,
जबसे जिक्र बस तेरा आ रहा ।

ना अब खुद से लड़ता हु ,
ना ही बची है कोई शिकायत ,
मिल गई मुझे जबसे ,
खुदा की सबसे खूबसूरत इनायत ।

मेरे खुशियों में तुम साथ होती हो ,
गम को भी मेरे बांट लेती हो ,
बदलने सा लगता हु मैं ,
जब जब तुम मेरे पास होती हो । 

तुम चांद के उस सूरज सी ,
मुझे लगने लगी हो ,
रात के अंधेरे में छिप कर ,
मुझे रौशनी से भरने लगी हो ।

तुमसा था नहीं कोई अब तक ,
जिसने मुझे मोहबब्त को ,
इस तरह जीना सिखाया हो ,
मोहबब्त होती है खूबसूरत ,
कर के जिसने बताया हो ।।

बारिश

पहले भी बरसे हो तुम ,
बादलों से टूट कर ,
बिन मौसम भी आए हो ,
अपने इश्क़ से रूठ कर ।

पर इस दफा जो तुम आए हो ,
संग अपने एक तूफान लाए हो ,
भीग रहा हर शख्स जिसमें ,
जिससे भी इश्क़ कर के आए हो ।

तेरा इंतजार पहले से अब ज्यादा है ,
बताना आखिर तेरे क्या इरादें हैं ,
वो भी भीगती है अब संग मेरे ,
जिसके बगैर हम आधे हैं ।

हमारे इश्क की कहानी का ,
तुम बहुत अहम हिस्सा हो ,
अल्फाज़ के श्रृंगार से जुड़ा ,
एक अनकहा किस्सा हो ।

तुम आए तो मिली मोहबब्त मुझे ,
किसी अधूरे अंधेरी रात में ,
थे पड़े लावारिस हम सड़क पर ,
लिए जख्मों के निशा साथ में ।

देखो अब वो तुमसा बनने लगी हैं ,
आकर जबसे बरसने लगी हैं ,
मोहबब्त तुमसे भी ज्यादा ,
अब वो किसी और करने लगी हैं ।

रिमझिम रिमझिम सा एहसास ,
बूंद बूंद जज़्बात बना रहें हैं ,
हवा के झोंके की हर छुअन में ,
वो बरसने को आ रहें है ।

बारिश सी मोहब्बत मेरी ,
किसी बारिश में ही मिली थी ,
आज बन कर बारिश ,
मुझ पर वो बरस रही थी ।।

Saturday, September 11, 2021

जीत तुम्हारी पक्की है !


तुम जिस सफ़र में निकले हो ,
उसका रास्ता तुम्हें मालूम है ,
छोड़ना मत हाथ किसी का ,
पीछे खड़ा तुम्हारे जो हुजूम है ।

हुजूम तुम्हारे अपनो का ,
तुम्हारे अनगिनत सपनो का ,
तुम्हारे इस पल के साथी का ,
और जिंदगी के हर एक ,
दिया और बाती का ।

कोई दीपक बन कर तुम्हें ,
रौशनी दिखा रहा ,
कोई सूरज के तपिश से ,
छत बन कर तुम्हें बचा रहा ।

कोई दोस्त है तुम्हारा ,
तो कोई बीता किस्सा ,
जिंदगी के इस पल तक ,
हर शख्स जो बना तुम्हारा हिस्सा ।

वो कल भी तुम्हारे साथ होंगे ,
हर हार और जीत में पास होंगे ,
बस तुम कभी दूर मत जाना ,
चाहे कितनी भी ऊंचाई छू आना ।

जीत तुम्हारी पक्की है ,
तुम्हारे इरादों सी ,
बस भूल मत जाना पोटली ,
खुद से किए वादों की ।

जीत तुम्हारी पक्की है ,
तुम्हारे इरादों सी ।।