Thursday, October 14, 2021

लाज़मी

तुम्हारे लबों पर हंसी ,
और दिल में सवाल लाज़मी हैं ,
भला कैसे जान गए हम वो सब ,
जो छिपा अजनबियों से आज भी है ।

मानता हु मेरे गुस्ताखी की ,
कोई माफी नहीं होगी ,
लिखी हुई मेरी बात ,
अब काफी नहीं होगी ।

चलो एक फरमाइश तुमसे ,
मैं कर के ही जाता हू ,
ख्वाइशों की पोटली से ,
एक ख्वाइश ले आता हू ।

मुस्कुराहट जरा इस दफा ,
होठों पर दिल से लाना ,
हो सके तो लम्हों में ही सही ,
खुल के मुस्कुराना ।

किसी और गहने से पहले ,
मुस्कुराहट का श्रृंगार ,
उस पर क्या खुब जचेगा ,
गर वो कभी मुस्कुराहट से सजेगा ।।

Wednesday, October 13, 2021

गुस्ताखी

तेरे मुस्कराते चेहरे के पीछे ,
एक मायूस दिल बैठा है ,
धड़कता था जो जोर जोर से ,
आज कल खामोश बैठा है ।

तेरे झुमके , तेरा काजल ,
और बिखरी जुल्फें तेरी ,
सब कुछ बता रहे हैं ,
तेरा हाल-ए-दिल सुना रहे हैं ।

दिल लगाती जितनी शिद्दत से तुम ,
तोड़ता उसे वो उतनी जोर से ,
तू करती मोहब्बत उससे ,
वो करता किसी और से ।

तुम तलाश में जिंदगी के ,
दिल अक्सर लगाती हो ,
खुद के जख्मों पर मरहम की आस में ,
उन्हें और घायल कर जाती हो ।

वैसे भी दिल तेरा कहां कोई ,
ऐसे ही चुरा पाता है ,
जब तक पूरी तरह तेरे दिल में  ,
वो उतर नहीं जाता है ।

मुस्कुराते तस्वीर को तेरे ,
सब सच मान बैठे हैं ,
इस महफिल में इकलौते हम ,
जिसे झूठ मान बैठे हैं ।

है और भी गुस्ताखी मेरे हिस्से ,
करते जिसे हम जाएंगे ,
अगली दफा जब कोई और झूठी ,
तस्वीर वो लगाएंगे ।।

लौटी थी जिंदगी

तुम मिली मुझसे जब अरसे बाद ,
कुछ भी तो नहीं बदला था ,
सिवाए निगाहें और नज़रिए के ,
सब कुछ तो पहले जैसा था ।

मैंने सोचा नहीं था कभी ,
की हम ऐसे भी मिलेंगे ,
बर्बाद कर के एक दूसरे को ,
जिंदा रह सकेंगे ।

बिखरी जुल्फ आज भी  ,
आंखो को तुम्हारे छिपा रही  ,
अपनी उन नाजुक उंगलियों से ,
क्यों नहीं जिन्हें तुम हटा रही ।

मेरे रकीब के दिए ज़ख़्म ,
क्यों तुम छिपा रही हो ,
इश्क़ में आज भी हो मेरे ,
फिर क्यों नज़रे चुरा रही हो । 

थामने को हाथ तुम्हारा ,
मेरे हाथ आगे क्यों नहीं बढ़ रहे ,
देख कर आंखो मे लाचारी ,
हम बाहों में तुम्हें क्यों नहीं भर रहे ।

लौट कर आई है जिंदगी मेरी ,
फिर भी मौत मुझे मंजूर है ,
बार बार मेरे हिस्से ही क्यों सजा ,
आखिर मेरा क्या कसूर है ।

दफ्न कब्र में लाश मेरी ,
भला कौन ही दिल लगाएगा ,
लौट कर आया महबूब मेरा ,
फिर लौट जाएगा ।

हार गया मैं हर बाजी इश्क़ की ,
अब जीतना रास नहीं आता ,
लौट कर आने वाला  ,
आखिर दूर ही क्यों जाता ।।

Tuesday, October 12, 2021

ये भी जरूरी था

जरूरी था मेरे खत का खोना ,
तेरा किसी और का होना ,
हर रात इस मलाल से ,
अपनी पलकों को भिगोना ।

तेरे आने से जाने तक ,
हर बात मुझे याद हैं ,
तेरा जिक्र तेरे निशान ,
आज भी उतने ही साफ हैं ।

ना मैंने कभी इजहार किया ,
ना तूने कभी इनकार किया ,
जिस पल मैंने तुझसे लगाया दिल ,
तुने उस पल किसी और से प्यार किया ।

वक्त के साथ बदल गया सब ,
बस मेरा इश्क़ नहीं बदला ,
दिल का हुआ हाल कुछ ऐसा ,
सर्द मौसम में था जो पिघला ।

आज भी तेरी याद में ,
हम किस्से दुनिया को सुनाते है ,
दस्ता-ए-इश्क़ में तुझे हीरो ,
खुद को विलन बताते हैं ।

मेरी आखिरी तुझसे ,
बस इतनी सी फरियाद है ,
मत बाटना मेरी मोहब्बत ,
रह गई जो तेरे पास है ।।

Sunday, October 10, 2021

दगेबाज

दिल में कुछ हलचल तो है मेरे ,
पर ये मलाल कैसा हैं ,
इश्क़ गर जवाब है सबका ,
तो ये सवाल कैसा है ।

मेरे मर्ज की दवा ना सही ,
ज़ख्म भी तो मत बढ़ाओ ,
दुआ ना करो मेरे लिए ठीक  ,
बद्दुआ तो मत दे जाओ ।

तुमसे मिला था जिस हाल में मैं ,
वो हाल अब मेरा हो चला हैं ,
कत्ल तेरी मोहब्बत का हुआ था तब ,
अब तू मेरी मोहब्बत का कर चला है ।

तेरी आंखों में सिवाए आंसू के ,
कुछ भी तो नहीं बचा था ,
महबूब छोड़ कर जबसे तेरा ,
तुझसे दूर हो चला था ।

कह कर माथे पर सजाने को बिंदी ,
बस इकलौता जुल्म मैंने किया था ,
उस रोज़ तूने मेरा ये हक भी ,
मुझसे छीन लिया था ।

गम मुझे तेरे जाने का नहीं ,
मेरे रहने का मुझे सताता है ,
बेवक्त अक्सर बीच रास्तों में ,
छोड़ कर तू यूहीं चला जाता है ।

दगेबाज .. मोहब्बत में तुम ,
कब तक ऐसे ही सताओगे ,
मरहम देने वाले के हिस्से में ,
ज़ख्म छोड़ कर जाओगे ।।

Saturday, October 9, 2021

सिगरेट सा इश्क़


तू इश्क़ मुझसे गर कर ,
अपनी सिगरेट सा करना ,
जला कर मुझे राख ,
खुद को ख़त्म करना ।

हर कश में लगेगी जन्नत आत्मा,
जहनूम जिस्म बन रहा होगा ,
लबों पर रख कर मुझे तू ,
जब सुकून से पी रहा होगा ।

तलब मेरी कुछ इस कदर ,
तुझे बर्बाद करती जायेगी ,
मोहबब्त इतनी गहरी होने लगेगी ,
छोड़ नहीं तू जिसे पायेगी ।

मंजर तो और भी देखेगी ,
मुझसे इश्क़ निभाने जब आयेगी ,
लबों पर बसने गैरों के ,
जब खुद मुझे छोड़ कर आयेगी ।

बन कर जहर मैं इश्क़ का ,
फिर उनको भी सताऊंगा ,
लबों से उतर कर ,
दिल में बस जाऊंगा ।

बस शिकायत इतनी सी ,
मैं आज दुनिया से करता हू ,
भला मैं टूटने पर ही सबके ,
अक्सर क्यों लबों पे जलता हू ।

आसान नहीं होगा इश्क़ मुझसे ,
गर कभी इरादा बन जाए ,
ना करू मैं इश्क़ किसी से ,
गर उसका महबूब मिल जाए ।।

Friday, October 8, 2021

मधुरिमा

मधुरिमा की ये खूबसूरत सौगात ,
आज हम सब को खुशनसीब,
देखो बना रही है ,
दिल से गा कर जब दिल चुरा रही है ।

सुर में संगम है जिसके ,
साज भी मस्त मलंग है ,
हया के चादर ओढ़े ,
ये कौन खूबसूरत नज़्म है ।

अल्फाज़ बस बन कर तस्वीर ,
खुद पन्नों पर उतर आए ,
जिन लम्हों को तुमने ,
अपने संगीत से सजाए । 

दिल के बिखरे टुकड़े तुम्हारे ,
क्या खूब तुम जिन्हें छिपाती है ,
बेहद ही सादगी से अक्सर ,
धुन नया जिन्हें दे जाती हो ।

इश्क़ को मुकम्मल नहीं ,
तुन्हें उसे मुमकिन बनाना है ,
दर्द में कैसे मुस्कुराते हैं अक्सर ,
तुम्हें दुनिया को सीखना है ।

अब तक टुकड़ों में मिली खुशियां ,
और बिखरे तुम्हारे जज़्बात हैं ,
बस रखना भरोसा वक्त पर अपने ,
वो आज भी तुम्हारे साथ है ।।

सफेद लिबास

सफेद रंग से इश्क भी ,
बेहद कमाल होता होगा ,
भूरी आखों वाली उस लड़की को ,
आइना जब सफेद लिबास में देखता होगा ।

वो खुद को सजाती नहीं होगी ,
माथे पर बिंदी लगाती नही होगी ,
ना कभी होठों पर रंग चढ़ता होगा ,
ना ही कोई और रंग जचता होगा ।

बस सफेद सा इश्क़ उसका ,
सफेद लिबास में निखर कर आता होगा ,
एक पल में जाने वाला मुसाफ़िर ,
ताउम्र उसे देखने वही रुक जाता होगा ।

स्वेत मन सा स्वेत सीरत जिसका ,
कितने दिलों को जलाती होगी ,
आईने की तस्वीर को जब ,
दुनिया से छिपाती होगी ।

आइना जब किसी की खूबसूरती से ,
खुद ही संवरता होगा ,
सफेद लिबास में वो शख्स ,
कितना खूबसूरत लगता होगा ।

ख्वाबों में बन कर परी नहीं ,
मेरे आखों की तस्वीर बन कर दिखाना ,
हो सके तो अलगी दफा ,
सफेद लिबास में ही मिलने आना ।।

Thursday, October 7, 2021

लिबास

देखा तुझे जो अरसे बाद ,
तेरे ज़ख्म नजर आए ,
मोहब्बत में था कंकाल छिपा ,
और क्या ही वो हाल-ए-दिल बताएं ।

ना अब तेरी मेरी वो बातें है ,
ना ही रातों से जुड़ी यादें है ,
बचा सिर्फ तेरा एहसास है ,
दूर हो कर भी जो मेरे पास है ।

इश्क़ का लिबास ओढ़ कर ,
ज़ख्म भला कैसे तुम छिपाती हो ,
तोड़ कर दिल अपना टुकड़ों में ,
मामूली से ज़ख्म जिन्हें बताती हो ।

चांद आज भी आसमान में ,
पलके बिछाए बैठा होगा ,
अपने उस एक तारे को ,
आकाश गंगा में ढूंढ रहा होगा ।

लौट कर आने को अब कहूंगा नहीं ,
क्योंकि तुमको मैं खो चुका हु ,
ना चाह कर भी दिल ,
किसी और को तुझ जैसे दे चुका हु ।

लिबास इश्क़ का हो मेरे ,
या हो तेरे टूटे दिल का , 
जब भी उतरने को आता है ,
ज़ख्म भला कहां छिप पाता है ।।

महबूब के सनम

कभी छोड़ा क्या इश्क़ में तुमने किसी को , 
किसी और से दिल लगाने के लिए ,
कहा है क्या छोड़ कर तुम्हें ,
उसका हो जाने के लिए ।

बड़ा ही दर्द भरा ये ज़ख्म होता है ,
जब मोहब्बत होकर भी ,
कोई आशिक़ अपनी मोहब्बत को ,
किसी और का होने को कह देता है ।

ना दिन के उजालों में रौशनी ,
ना रात के अंधेरे में जुगनू ,
ना ही धड़कनों का कहीं ,
शोर कोई सुनाई देता है ।

इश्क़ में बिखरने की दास्तां ,
और बिखरते रिश्तों के निशान ,
आज भी बहुत सताते हैं ,
इश्क़ में मीत से जब दूर हो जाते हैं ।

हर पल हर कदम पर ,
उसकी बात निकल ही आती है ,
इश्क़ के कहानियों की ,
बात जब भी शुरू हो जाती है ।

मेरे नींद से जुड़े जिसके ख़्वाब थे ,
मेरी खुशियों की सौगात जिसके पास थे ,
सब कुछ एक पल में देखो बिखर गया ,
इश्क़ जब उसे भी किसी और से हो गया ।

महफूज़ रहो तुम बाहों में उसके ,
जन्नत उसकी दुनिया बनाओ ,
इश्क़ में कुर्बानी मेरे हिस्से ,
तुम बस शिद्दत से इश्क़ निभाओ ।

मोहबब्त में कुर्बानी की ,
तुमने ये कैसी सजा दे डाली है ,
बना दी जिंदगी मेरी ,
लावारिस और बेचारी है ।।

Tuesday, October 5, 2021

तौबा

डर लगता है मुझको वादों से ,
क्या सच में जिन्हें निभा पाऊंगा ,
या चंद लम्हों की ख्वाइश लिए ,
तोड़ जिन्हें कही और उड़ जाऊंगा ।

पल भर की होगी खुशी ,
या गम की दास्तां मैं सुनाऊंगा ,
जब करने मोहब्बत का वादा ,
कभी तेरे पास आऊंगा । 

मुझे भरने हैं घाव अपने ,
तेरे जख्म की परवाह नहीं ,
इश्क़ में मुझ जैसा मामूली है ,
तू कोई खुदा नहीं ।

जब तक हासिल होता नहीं,
तुझे पाने की मन्नते मांगता हू ,
मिल जाती है जैसे ही मोहब्बत तेरी ,
गैर से दिल लगाता हू ।

इश्क़ में भूखा और प्यासा ,
सिर्फ आशिक ही नहीं सोता ,
कई दफा दगेबाज़ी मिलने का बाद ,
हाल महबूब का भी यही होता ।

बस ऐसे ही कुछ ख्याल ,
मेरा दिल तोड़ जाते हैं ,
हर दफा जब इश्क़ में ,
वादा करने का मन बनाते हैं ।।

तुम और सुकून

पहाड़ की ऊंचाइयों पर ,
जब तुम आकर मेरे गले लगे थे ,
सर्द पड़े उस मौसम में भी ,
बर्फ पहाड़ों से पिघल रहे थे ।

तुम्हारी आंखों में थी जन्नत ,
और कई खूबसूरत ख़्वाब ,
जीने लगे थे जो इस पल में ,
तुम उठा कर नकाब ।

तुम्हारे होठों पे मुस्कुरहाट ,
और पलकों की शरारत ,
जुल्फ भी तुम बिखेर रहे थे ,
जब मेरा होने को पास आ रहे थे ।

थाम कर हाथ मेरा जब ,
तुमने चलना शुरू किया ,
रोक कर कही बीच रास्ते ,
मेरे लबों को छू लिया  ।

खुले आसमां में ख्वाइश ,
जब अपनी वो पूरी कर रहे थे ,
अमावस की रात में भी ,
चांद को चमकता देख रहे थे ।

बढ़ते कदम घर की ओर ,
धड़कनों को बढ़ाने लगे था ,
अरसे बाद फिर इस दिल में ,
वो घर बसाने लगे थे ।

पहाड़ों पर बर्फ की चादर ,
अब पिघलने लगी है ,
सूरज की किरणों से ,
जबसे वो मिलने लगी है ।

तेरे साथ सा खूबसूरत ,
कोई और लम्हा क्या होगा ,
तेरी बाहों में सुकून ,
जिसमें पूरा जहां होगा ।

मिल गई खुशियां मुझे ,
और इश्क़ की सौगात ,
था मेरे हिस्से जो छूट गया ,
वो एक खूबसूरत रात ।।

Wednesday, September 29, 2021

रकीब की बिंदी

माथे से उसने बिंदी नहीं ,
मेरे इश्क़ को हटाया था ,
मिलने जब उससे उसका ,
कोई मीत आया था ।

रूठने पर मनाने का सिलसिला ,
आज मैंने फिर शुरू किया था ,
मान कर जेहनसीब जिसे ,
उसके हिस्से अपना वक्त किया था ।

दिल जो पहले जिससे लगा था ,
वो आज अजनबी सा लग रहा था ,
मेरे इज़हार करने पर पहली दफा ,
वो अपनी नज़रे फेर रहा था ।

मुकम्मल हो इश्क़ उसका ,
लिखा जो हो उसके नसीब में ,
रकीब नहीं बनना मुझे  ,
किसी दिलजले के इश्क़ में ।

हारना लाज़मी होता है इश्क़ में ,
किसी को जिताने के लिए ,
एक तरफा मोहब्बत को ,
इस कदर निभाने के लिए ।

मिलेगा कोई एक रोज़ मुझे ,
जो मुझसे भी इश्क़ निभायेगा ,
मेरे नाम की बिंदी से ,
खुद को सजाएगा ।।