Tuesday, September 11, 2018

खौफ

मुश्किलों के दौर से ,
चल रही थी ज़िन्दगी ,
थक रही थी .. रुक रही थी ,
दौड़ रही थी ज़िन्दगी .

कल से हर पल जा ,
मिल रही थी ज़िन्दगी ,
थोड़ी सहमी , थोड़ी डरी ,
कही जा पड़ी थी ज़िन्दगी .

खौफ के मंजर से ,
जब भी हो रहा था वास्ता ,
मानो खो जा रही थी ,
ज़िन्दगी अपना रास्ता .

वो रात वो दिन ,
आज भी डराते है ,
सोच जिसके चंद लम्हो को ही ,
हम सहम जाते है .

जंग हार कर भी ,
जी रही है ज़िन्दगी ,
जबसे हो रही धीरे धीरे ,
हिम्मत से उसकी बंदगी ..II

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